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Wednesday, November 6, 2013

इतिहास रचबा लेल बिदा भेल मंगलयान

अन्तरिक्ष विज्ञानक दुनिञामे अपन देश इतिहास रचबा दिस मंगलकेँ ‘मंगलयान’ केर सधल डेग बढ़ेलक अछि। ‘मंगलयान’मंगलकेँ लाल ग्रह लेल विदा भऽ गेल। पीएसएलभी रॉकेटसँ दुपहरियामे ठीक 2 बाजि कऽ 38 मिनटपर श्रीहरिकोटासँ ई उड़ल। नैनो कार सन ई रॉकेट एहि मंगलयानकेँ अंतरिक्षमे छोेड़ि देत जाहिठाम ई कि छु दिन पृथ्वीक चारू भर चक्कर लगेबाक बाद नओ मासक कठिन यात्रापर मंगल ग्रह दिस बढ़ि जायत। सम्पूर्ण देशक नजरि भारतक एहि मिशन मंगलयानपर टिकल अछि। लोकक मंगलमय भविष्य लेल भारतीय मंगलयान 25 करोड़ किलोमीटरक यात्रा पूरा करबा लेल विदा भेल अछि आ अपना लक्ष्य दिस निरन्तर बढ़ल जा रहल अछि। मंगल आ मार्स ग्रीक युद्धक देवताक नामपर एहि ग्रहक नाम राखल अछि। एहि ग्रहकेँ पृथ्वी के र सभसँ लगीचक भाय कहल जाइत अछि। ई ग्रह लाल आ गहींर कत्थी सन देखाइत अछि संगहि रहस्य आ रोमाञ्चसँ परिपूर्ण अछि।
तय करत 25-40 करोड़ किमीटरक यात्रा
मंगल ग्रह लग पहुँचत भारतक मंगलयान। अंतरिक्षक अत्यन्त कठिन, ओझरायल आ खतरनाक यात्रापर लगभग 25 करोड़सँ 40 करोड़ किलोमीटर धरिक यात्रा तय कऽ मंगलयान मंगल ग्रहकेँ लगसँ देखत, सूँघत आ वातावरणक स्वाद लेबाक प्रयास सेहो करत। ओहिठाम ई जीवन देखत, जीवनक अवशेष ताकत आ उजरल-उपटल ओहिठामक वातावरणक गणना करत ई छोट भीम। एहि मंगलयानकेँ छोट भीम नाम देल गेल अछि। टाटा नैनो कार सन आकार आ 1350 किलो ओजनवला एहि यानकेँ किछु वैज्ञानिक छोटका भीमक नामसँ सेहो बजबै छथि। ई मंगलक चारू भरि फेरा लगाओत। पीएसएलभी रॉकेट एखन धरि फराक-फराक उपग्रहकेँ पृथ्वीक कक्षामे स्थापित कऽ चुकल अछि आ एहिमे पारंगत भऽ गेल अछि। पीएसएलभीक ई 25म उड़ान अछि। श्रीहरिकोटाक सतीश धवन स्पेस सेण्टरमे ठाढ़ 15 महल मकान सन 44.4 मीटर ऊँच, लगभग 50 हाथीक ओजन जतबा 320 टन ओजन, पीएसएलभी विश्वस्त आ परखल रॉकेट अछि। मंगल 5 नवम्बर 13 केँ ठीक 2.38 बजे ई रॉके ट छूटल जे लगभग 40 मिनट धरि उड़बाक बाद बेरा-बेरी रॉकेटक चारू चरण फराक होइत गेल। अंतरिक्षमे पहुँचिते अंतिम चरण दू हिस्सामे बँटि जायत आ मंगलयान बाहर निकसि जायत। एकरा बाद 6 बेर मंगलयान अपन रॉकेट दागि ओकरा पृथ्वीक विशेष कक्षामे आनत। लगभग 20-25 दिन धरि मंगलयान पृथ्वीक प्रदक्षिणा कऽ आस्ते-आस्ते पृथ्वीसँ दूर होइत जायत आ एकाएक पृथ्वीक गुरूत्वाकर्षणसँ हटि कऽ डीप स्पेस दिस तीव्र गतीसँ बढ़त जकरा सोझे-सोझ मंगल दिस मोड़ि देल जायत। ई लगभग 25 करोड़ किलोमीटरक दूरी धरि जायत। एहिठाम पृथ्वीपरसँ एहि यानपर नजरि रखबा लेल आ एकरासँ बात करबा लेल, निर्देश देबा लेल विशेष व्यवस्था कयल गेल अछि। अण्डमान निकोबार द्वीप समूहमे पोर्ट ब्लेयरमे अन्तरिक्ष टैÑकिंग स्टेशन बनल अछि। एकरा अतिरिक्त बैंगलुरु लग बायलालूमे इसरो केर विशेष टीसन अछि जाहिठाम लगभग 32 फीटक भीमकाय डिश अछि। एहि यानपर नजरि रखबा लेल प्रशान्त महासागरमे शिपिंग कॉर्पोरेशन आॅफ इण्डियाक दू गोट जहाज एससीआइ नालन्दा आ एससीआइ यमुना समुद्रमे मोस्तैद अछि।

एहि यानक विशेषता
एहि यान लेल अंतरिक्षमे 25 करोड़ कि लोमीटर केर यात्रा सुलभ नञि अछि। एहि क्रममे मंगलयानकेँ सौर विकिरणक खतरा सेहो रहत। एकरा बहुत कम आ बहुत बेसी तापमानसँ जेबा काल अपन उपकरणकेँ बचाबऽ सेहो पड़त। एतबे नञि डीप स्पेसमे कनिञे चूकि गेलापर अन्त-अन्त धरि कोनो यान बौआ सकैत अछि। ओना एहिसँ बचबाक इन्तजाम वैज्ञानिक ओना कऽ चुकल छथि।
1- पूरा मंगलयानकेँ गोल्डेन कलरक कवरसँ लपेटल गेल अछि। ई कवर खास कऽ कम्मलक काज करत जे ओकरा गरमी आ जाड़ दुनूसँ बचाओत।
2- डीप स्पेसमे अबिते सौर विकिरण आ सूर्यक अल्ट्रावायलेट कि रणसँ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणकेँ खराब हेबाक खतरा बढ़ि जाइत अछि ई कौभर एहूसँ बचाओत।
3- अपन दिशासँ नञि भटकय एहि लेल एहिमे एक टा नञि दू-दू स्टार सेंसर उपकरण लगाओल गेल अछि। एहिसँ पहिने चन्द्रमा दिस गेल चन्द्रयानमे स्टार सेंसरमे खराबी आबि गेल छल। इसरो द्वारा एहि गलतीकेँ सुधारि लेल गेल अछि।
4- पृथ्वीसँ सम्पर्क सधबा लेल धरतीसँ आबऽवला कमजोर सिग्नल पकड़बा लेल मंगलयानमे पैघ डिश लगाओल गेल अछि।
अगिला बरख 24 सितम्बरकेँ पहुँचत मंगलक कक्षा धरि
एहि यानमे अपन 800 किलोग्राम इन्धन अछि। लगभग 25 किलोमीटरक नम्मा यात्राक क्रममे इन्धन बचायब आ मंगल लग पहुँचबापर लगभग 9 माससँ सूतल ओकर मुख्य इञ्जनके ँ दोबारा चलायब इसरोक वैज्ञानिक लेल सभसँ पैघ चुनौती रहतनि। एहि लेल एहि यानमे 2 विशेष कम्प्यूटर लगाओल गेल अछि। यानमे कोनो असुविधा हेबापर कम्प्यूटर स्वयं निर्णय लेबामे आ मंगलयान केर बाट दुरुस्त करबामे सक्षम अछि। पृथ्वीक कक्षासँ निकसि लगभग 9 मासक यात्राक बाद मंगलयान 24 सितम्बर 2014 केँ मंगल ग्रहक कक्षामे पहुँचि जायत आ रॉकेटमे फायर कऽ एकरा मंगलक ओहि अण्डाकार कक्षा दिस आनल जायत जाहिठाम मंगलक धरतीसँ ओकर कमसँ कम दूरी रहत।
कमसँ कम 365 किलोमीटर आ बेसीसँ बेसी 80,000 किलोमीटरक दूरी रहबाक उमेद अछि। ई अगिला छओ मास धरि एहि ग्रहक रहस्यके ँ सोझरेबाक प्रयास करत। मंगलयानमे अपना देशमे बनाओल गेल पाँच गोट विशेष उपकरण लागल अछि। ई सभ उपकरण सोलर पैनलसँ बनल बिजलीसँ चलत। आखिर   ओहिठाम उतरने बिनु जीवनक संकेत कोना ताकत? मंगलयानपर लागल मीथेन सेंसर पहिल बेर कोनो मार्स मिशन एहन उपकरण लऽ कऽ जा रहल अछि। जे मंगलक वातावरण आ सतहमे मीथेनक उपस्थितिक पता लगाओत। मीथेन माने जीवनक चिह्न। एकर अतिरिक्त एहि यानपर 360 डिग्री धरि फोटो घीचबा लेल विशेष कैमरा लागल अछि। मंगलयानपर थर्मल सेंसर सेहो लागल अछि जे मंगल ग्रहक ठण्ढा हिस्सामे अत्यन्त गर्म हिस्साके ँ चिन्हबाक प्रयास करत जाहिसँ ई बुझल जा सकय जे आखिर एहि ग्रहपर मौसम एतबा तेजीसँ कोना बदलैत अछि।
एहि यानसँ मंगल ग्रहक फोटो, वातावरणसँ जुड़ल आँकड़ा सहित वैज्ञानिक ई उमेद करता जे चन्द्रयान जाहि तरहे ँ चन्द्रमापर पानि ताकि लेलक ठीक ओहिना किनसाइत मंगलयान एहि ग्रहसँ जुड़ल किछु पैघ राज फोलि सकय। प्राय: मीथेनक खोज कऽ सकय जे जीवनक पहिल संकेत मानल जा सकैत अछि, मुदा एहि यानसँ पृथ्वीपर बैसल वैज्ञानिककेँ सम्पर्क साधब सुलभ नञि हेतनि। मंगलक कक्षामे पहुँचबाक बाद मंगलयान धरि पृथ्वीसँ सन्देश पहुँचबामे 20 मिनट लागत आ यानके ँ जबाव देबामे सेहो 20 मिनट लागत। एकर माने मंगलयानक हालचाल बुझबा लेल लगभग 40 मिनट धरिबाट देखऽ पड़त।

साभार : मिथिला आवाज़ मैथिली दैनिक समाचार में प्रकाशित 

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