समाजिक क्षेत्रक संस्था नव पल्लव वार्षिकोत्सव ‘नवश्रुति-2013’ केर आयोजन 29 दिसम्बर 2013केँ कान्स्टिटूशन क्लब रफ़ी मार्ग स्पीकर हॉल दिल्लीमे आयोजित करबाक निर्णय लेलक अछि। एहि अवसरपर ‘अयाची छात्रवृत्ति’ प्रदान कएल जाएत। ई छात्रवृत्ति कार्यक्रम दू श्रेणीमे दू चरणमे आयोजित होएत। पहिल श्रेणीमे दिल्ली एवं एनसीआर केर सरकारी विद्यालय सभमे अध्यनरत कक्षा 9 एवं 10 केर छात्र-छात्रा भाग लऽ सकता। दोसर श्रेणीमे दिल्ली एवं एनसीआर केर सरकारी विद्यालयमे अध्ययनरत कक्षा 11 एवं 12 केर छात्र- छात्रा अपन भागिदारी निश्चित कऽ सकैत छथि। चरण एकमे देल गेल विषयपर छात्र लोकनिकेँ हिन्दीमे एकटा निबन्ध लिखबाक होएत। पहिल श्रेणीमे शब्द सीमा 350-400 आ द्वितीय श्रेणीमे 550-600 शब्द होएत। निबन्ध केर विषय पहिल श्रेणी लेल ‘मेरे सपनों का भारत - मैं करूं भारत निर्माण’ आ द्वितीय श्रेणीमे ‘भ्रष्टाचार- कारण और निवारण’ अछि। दोसर चरणमे देल गेल विषयपर व्याख्यान निश्चित समय सीमापर देबाक अछि। विषय पहिल श्रेणी लेल ‘यत्र नार्यस्तु पुज्यते, रमन्ते तत्र देवता:’ आ द्वितीय श्रेणी लेल ‘नारी के साथ दुर्यव्यवहार- कैसे हो इसका उपचार’ अछि। एहि चरण लेल समय सीमा प्रथम श्रेणी लेल 3.5 मिनट प्रति प्रतियोगी आ द्वितीय श्रेणी लेल 5 मिनट प्रति प्रतियोगी रहत। दुनू श्रेणीमेसँ सर्वश्रेष्ठ निबन्ध लिखऽ वला 10-10 छात्र/छात्राकेँ व्याख्यान प्रतियोगिता लेल नव श्रुति आयोजन स्थलपर 29 दिसम्बरकेँ बजाएल जाएत। आयोजन सचिव कृष्ण कुमार झा जनौलनि जे एहि प्रतियोगितामे भाग लेबा लेल कोनो फीस नहि लागत। व्याख्यान प्रतियोगितामे भाग लेबऽ वला छात्रमेसँ दू सर्वश्रेष्ठ छात्र/छात्राकेँ 500 प्रति मास एक बरख धरि छात्रवृत्ति देल जाएत। अन्य प्रतियोगीकेँ प्रोत्साहन पुरस्कार देल जाएत। ओ जनौलनि जे ओ निबन्ध जे डाक, स्पीड पोस्ट, कूरियर अथवा अपने लऽ कऽ 23 दिसम्बर सायं छओ बजेसँ पहिले पहुँचि जाएत ओहि सभ निबन्धकेँ प्रतियोगितामे शामिल कऽ लेल जाएत। आयोजन सचिव विशेष रूपसँ कहलनि जे प्रत्येक प्रतिभागी अपन निबन्ध केर अन्तमे अपन नाम, कक्षा, रोल नम्बर, विद्यालय केर नाम एवं सम्पर्क हेतु मोबाइल वा फोन नम्बर देब नञि बिसरथि, आ निबन्ध विद्यालय केर प्रधानाध्यापक द्वारा सत्यापित हेबाक चाही।
Saturday, December 21, 2013
अयाची छात्रवृत्ति कार्यक्रम 29 दिसम्बरकेँ
समाजिक क्षेत्रक संस्था नव पल्लव वार्षिकोत्सव ‘नवश्रुति-2013’ केर आयोजन 29 दिसम्बर 2013केँ कान्स्टिटूशन क्लब रफ़ी मार्ग स्पीकर हॉल दिल्लीमे आयोजित करबाक निर्णय लेलक अछि। एहि अवसरपर ‘अयाची छात्रवृत्ति’ प्रदान कएल जाएत। ई छात्रवृत्ति कार्यक्रम दू श्रेणीमे दू चरणमे आयोजित होएत। पहिल श्रेणीमे दिल्ली एवं एनसीआर केर सरकारी विद्यालय सभमे अध्यनरत कक्षा 9 एवं 10 केर छात्र-छात्रा भाग लऽ सकता। दोसर श्रेणीमे दिल्ली एवं एनसीआर केर सरकारी विद्यालयमे अध्ययनरत कक्षा 11 एवं 12 केर छात्र- छात्रा अपन भागिदारी निश्चित कऽ सकैत छथि। चरण एकमे देल गेल विषयपर छात्र लोकनिकेँ हिन्दीमे एकटा निबन्ध लिखबाक होएत। पहिल श्रेणीमे शब्द सीमा 350-400 आ द्वितीय श्रेणीमे 550-600 शब्द होएत। निबन्ध केर विषय पहिल श्रेणी लेल ‘मेरे सपनों का भारत - मैं करूं भारत निर्माण’ आ द्वितीय श्रेणीमे ‘भ्रष्टाचार- कारण और निवारण’ अछि। दोसर चरणमे देल गेल विषयपर व्याख्यान निश्चित समय सीमापर देबाक अछि। विषय पहिल श्रेणी लेल ‘यत्र नार्यस्तु पुज्यते, रमन्ते तत्र देवता:’ आ द्वितीय श्रेणी लेल ‘नारी के साथ दुर्यव्यवहार- कैसे हो इसका उपचार’ अछि। एहि चरण लेल समय सीमा प्रथम श्रेणी लेल 3.5 मिनट प्रति प्रतियोगी आ द्वितीय श्रेणी लेल 5 मिनट प्रति प्रतियोगी रहत। दुनू श्रेणीमेसँ सर्वश्रेष्ठ निबन्ध लिखऽ वला 10-10 छात्र/छात्राकेँ व्याख्यान प्रतियोगिता लेल नव श्रुति आयोजन स्थलपर 29 दिसम्बरकेँ बजाएल जाएत। आयोजन सचिव कृष्ण कुमार झा जनौलनि जे एहि प्रतियोगितामे भाग लेबा लेल कोनो फीस नहि लागत। व्याख्यान प्रतियोगितामे भाग लेबऽ वला छात्रमेसँ दू सर्वश्रेष्ठ छात्र/छात्राकेँ 500 प्रति मास एक बरख धरि छात्रवृत्ति देल जाएत। अन्य प्रतियोगीकेँ प्रोत्साहन पुरस्कार देल जाएत। ओ जनौलनि जे ओ निबन्ध जे डाक, स्पीड पोस्ट, कूरियर अथवा अपने लऽ कऽ 23 दिसम्बर सायं छओ बजेसँ पहिले पहुँचि जाएत ओहि सभ निबन्धकेँ प्रतियोगितामे शामिल कऽ लेल जाएत। आयोजन सचिव विशेष रूपसँ कहलनि जे प्रत्येक प्रतिभागी अपन निबन्ध केर अन्तमे अपन नाम, कक्षा, रोल नम्बर, विद्यालय केर नाम एवं सम्पर्क हेतु मोबाइल वा फोन नम्बर देब नञि बिसरथि, आ निबन्ध विद्यालय केर प्रधानाध्यापक द्वारा सत्यापित हेबाक चाही।
Wednesday, December 11, 2013
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बाजल मिथिला केर सन्तानक विजयक डंका
चुनावमे टूटल कतेको मिथक : सञ्जीव झा
भारतमे पहिल लोकतंत्रक ध्वज फहरेनिहार मिथिलाक युवा सपूत देशक राजधानी दिल्लीमे व्याप्त कदाचारक गन्दगीकेँ अपन झाड़ूसँ बहारि देबाक संकल्पक संग ओहि ठामक विधानसभामे प्रवेश केलनि अछि। एहि बेर भेल चुनावमे दिल्लीक बुरारी विधानसभा क्षेत्रसँ ‘आप’ सँ विजयी मधुबनी जिला केर भिट्ठी सुन्दरपुर निवासी सञ्जीव झासँ मैथिल गौरवान्वित भेला अछि। भिट्टी सुंदरपुर केर सुशील झा केर 4 पुत्रमे तेसर 34 वर्र्षीय सञ्जीव पिछला 12 सालसँ दिल्लीमे छथि। एमबीए करबाक बाद ओ बिरला ग्रुप केर शेयर ब्रोकिंग कम्पनीमे बिजनेस डेवलपमेण्ट आॅफिसरक रूपमे काज कऽ रहल छला। ओ दिल्ली विश्वविद्यालयसँ एखन एलएलबी सेहो कऽ रहल छथि। एही बीच समाजसेवा दिस सेहो डेग बढ़ा देलनि जे हुनका राजनीतिक क्षेत्रमे सक्रिय हेबाक माध्यम बनल आ ओकर परिणति भेल अछि हुनक जनप्रतिनिधि बनब। राजनीतिक क्षेत्रमे सक्रियताक कारण सञ्जीव केर सभसँ पैघ भाइ अरुण झाक अपन गामक मुखिया होयब सेहो बनल। सञ्जीव झा केर रुचि समाजसेवामे छलनिहेँ जे हुनका जनलोकपाल आन्दोलनसँ प्रारम्भिके समयमे जोड़ि देलक। एहिसँ पहिने दिल्लीमे प्रवासी मैथिल लेल काज कऽ रहल संस्था ‘नव पल्लव’ सँ जुड़ला आ अद्यापि ओहि संस्थाक सक्रिय सदस्य छथि। दिल्ली सन महानगरक विधानसभामे प्रवेशक बादो ओ अपन सामाजिक गतिविधिसँ डेग पाछाँ नञि करबा लेल कृत संकल्पित छथि। बुरारी विधानसभा क्षेत्रसँ अपन निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी केर श्रीकृषणाकेँ 10,351 भोटसँ पराजित केनिहार सञ्जीव झा कहै छथि जे ई विजय जनताक अछि। जनताक प्रसंग एकटा मिथक छल जे ओहो इमनदार नञि छथि। दिल्लीक जनता एहि मिथककेँ तोड़लक छि। ई प्रमाणित भेल अछि जे जँ जनताकेँ स्वच्छ छविक प्रत्याशी भेटता तँ ओ हुनका चुनता। हम सभ अपन जाहि बातकेँ लऽ कऽ जनता केर बीच गेल रही तकरा मतदाता स्वीकार केलनि।
मिथिला समाज केर सम्बन्धमे सञ्जीव कहलनि जे अपना समाजक प्रसंग सेहो एकटा मिथक छल जे मैथिल समाज कखनो एक नञि भऽ सकैत अछि, मुदा बुरारी केर हजारो प्रवासी मैथिल एहि चुनावमे एहू मिथककेँ तोड़ि देलनि। मिथिला आ मैथिल केर नाम पर मैथिल समाज सदैव एक संग ठाढ़ होइत अछि, एहि तथ्यकेँ दिल्ली केर मैथिल प्रमाणित केलनि अछि। सञ्जीव कहलनि जे हुनक विजयमे अपन मैथिल समाजक भूमिका सेहो अहम रहलअछि।
सञ्जीव झा केर एहि विजयसँ दिल्लीमे हुण्डइ मोटरमे काज कऽ रहल हुनक भाइ नरेन्द्र सहित अन्य परिजन आ ‘नव पल्लव’ सँ जुड़ल सभ सदस्य गदगद छथि। ‘नव पल्लव’ केर सचिव भवन ठाकुर कहै छथि जे हुनका सभक लेल ई गौरवक विषय अछि जे हुनका सभक बीचसँ एक गोट युवा सदस्य आइ दिल्ली विधानसभामे बुरारी क्षेत्रक प्रतिनिधित्व करबा लेल पहुँचला अछि। हुनक एहि विजयसँ ‘नव पल्लव’ केँ सेहो नव उत्साह भेटल अछि। सञ्जीवजी आरम्भेसँ ‘नव पल्लव’ मे सक्रिय छथि। आब ओ आरो सक्रिय हेता। ‘नव पल्लव’ केर सदस्य नीरज पाठक, कृष्ण कुमार, रामचन्द्र झा, आशुतोष झा, सत्येन्द्र झा आदि सञ्जीवक एहि सफलताकेँ हुनक क्षेत्रक लेल तँ नीक मानिते छथि, दिल्लीमे रहि रहल प्रवासी मैथिल, खास कऽ युवा लेल महत्वपूर्ण मानै छथि।
रेकार्ड भोटसँ जितला अनिल झा
दिल्ली विधानसभा चुनामे रेकार्ड मतसँ विजयी भेनिहार विधायक मिथिले देलक अछि। किरारी विधानसभा क्षेत्रसँ विजयी अनिल झा मधुबनी जिला केर बेनीपट्टी बरहा गामक थिका। ओ लगातार दोसर बेर भारतीय जनता पार्टी केर प्रत्याशीक रूपमे रेकॉर्ड मतसँ विजयी भेला अछि। अनिल झा अपन निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्र्टी केर रञ्जन प्रकाश के 48,526 रेकार्ड भोट सँ पछाड़लनि अछि। स्व. आनन्द मोहन झा आ निर्मला देवी केर तीन सन्तानमे सभसँ पैघ अनिल झा छात्र जीवने सँ राजनीतिमे सक्रिय छथि। ओ लगातार पाँच साल धरि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदसँ दिल्ली विश्वविद्यालय केर अध्यक्ष सेहो रहल छथि। श्री झा 2008 केर विधानसभा चुनावमे सेहो एहि क्षेत्रसँ अपार बहुमतसँ विजयी रहल छला। श्री झा ‘हमरासँ बात करैत कहलनि जे हुनका जनता केर जे आपार समर्थन भेटलनि अछि तकर पाछाँ एक मात्र कारण अछि विकास। अपना कार्यकालमे ओ बहुत विकासक काज केलनि अछि। लगभग 4000 सँ बेसी सड़क केर निर्माण ओ अपना क्षेत्रमे करेलनि। मिथिला आ मैथिलक प्रसंग हुनक कहब छलनि जे मिथिला केर जनता तँ हुनक रीढ़ छथि। ई जनता सभ खाद-पानि दऽ पोसलनि तखने तँ ओ गाछ बनला अछि। मिथिला आ मैथिल लेल ओ सदिखन सभसँ आगाँ ठाढ़ रहैत एला अछि। आगाँ सेहो एहिना रहत। उल्लेखनीय अछि जे विधायक श्री झाक पिता सेहो मिथिला-मैथिलीक प्रखर-मुखर सेनानी रहला। दिल्लीमे जहिया कहियो मिथिला-मैथिलीक कोनो गतिविधि भेल, आन्दोलन भेल आनन्द मोहन झा एहिमे सक्रिय सहभागिता देलनि। ओ आजीवन एहिमे जुटल रहला। अनिल झा अपन पिताक अभिलाषा मिथिला-मैथिली-मैथिलक उत्थानकेँ पूरा करबाक आकांक्षी छथि।
मिथिलाक बेटी वन्दना पछाड़लनि दिग्गजकेँ
अपना कोखिसँ भगवती सीताकेँ उद्भूत केनिहारि मिथिलाक धरती एकसँ एक सुपुत्रीकेँ जन्म दैत रहली अछि जे देश-विदेशमे क्षेत्रक नाम जगजियार करैत रहली अछि। से सामाजिक, शैक्षिक, राजनैतिक आदि सभ क्षेत्रमे। मिथिलाक एहने बेटी छथि वन्दना कुमारी जे दिल्लीक चुनावमे शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्रसँ विजय-केतु फहरेलनि अछि।
ओ मुजफ्फरपुर जिलाक पारू प्रखण्डक छाप गाम निवासी स्व. ब्रजकिशोर शर्माक पुत्री छथि आ एखन दिल्लीक शालीमार बागमे पति सञ्जीव कुमारक संग रहै छथि। हुनक सासुर मुजफ्फरपुरक बथना गाम छनि। तीन बेर भाजपाक विधायक विधायक रहि चुकल रवीन्द्रनाथकेँ 10,712 भोटसँ पछारनिहारि वन्दनाकेँ राजनीति अपना पितासँ विरासतिमे भेटलनि अछि। हुनक पिता भारतीय जनता पार्टीसँ जुड़ाव रखै छला आ अपना समयमे राजनीतिमे नीक प्रवेश आ प्रभाव छलनि। ओना वन्दनाक रुचि राजनीति दिस नञि छलनि। ओ राजनीतिसँ अपनाकेँ फराक राखि किछु करऽ चाहै छली, मुदा ‘आप’ केर से बिहाड़ि उठल जे ओ अरविन्द केजरीवालक आह्वानपर अपनाकेँ नञि रोकि सकली आ चुनाव मैदानमे उतरि पड़ली। समरमे उतरली तँ फेर देखा देलनि जे मैथिलानी कोना विजयक डंका बजबै छथि, कोना दिग्गज पर्यन्तकेँ माटि धरा दै छथि।
Saturday, November 30, 2013
अतीत पर गर्व, वर्तमान पर पीड़ा
आंखि स्क्रीन पर टिकल छल। मोन बेर-बेर एकटा गप दोहरा रहल छल- काश! अगर संरक्षण भेल रहिते त आइ हमर पहचान किछु आओर हाइते। दरभंगा क प्रशासनिक व्यवस्था हो वा फेर सुन्दर सरपट सड़क पर दौड़ैत बग्गी वा रोल्स रॉयल क नाचैत पहिया, सपना सन लागि रहल इ हकीकत कोनो सपना स कम नहि अछि। दरभंगा क बेला पैलेस स्थित विशेश्वर सिंह सभागार मे अपन स्वर्णिम अतीत कए देख सब स्तब्ध छल। दरभंगा फिल्म क्लब क तत्वावधान मे आयोजित वाइव्रेन्ट दरभंगा नामक एहि कार्यक्रम मे 1931 स 1941 क बीच बनल किछु फिल्म क 12 गुना 10 क स्क्रीन पर प्रदर्शन भेल त सभागार कई दशक पाछु चल गेल। ब्लैक एंड ह्वाइट क संगहि रंगीन फिल्म सेहो देखबा लेल भेटल। इ जरूर से एतबा पुरान फिल्म आजुक एचडी सन स्पष्ट नहि छल, बावजूद ओ अपन सुहनगर इतिहास कए देखा देलक जे देखि उत्साह स शरीर क एक एक टा अंग मे कंपन भ गेल। समारोहक क पहिल प्रस्तुति 1941 मे बनल फिल्म छल। इ संभवत: भारत क पहिल रंगीन वीडियो अछि। एहि मे तात्कालिक राजकुमार जीवेश्वर सिंह क उपनयन देखाओल गेल। एहि अवसर पर करीब 130टा राजा दरभंगाक पाहुन बनल छलाह। हुनका सब लेल दरभंगा विशेष विमान क व्यवस्था केने छल, जेकर गवाह दरभंगा क एयरपोर्ट आ इ फिल्म अछि। एहि मे दरभंगाक ओ शान देखबा लेल भेटल जे आब खिस्सा भ चुकल अछि।
दोसर फिल्म ओहि कार्यक्रमक छल जाहि मे शामिल हेबा लेल भारत क वायसराय विटोरी दरभंगा भ्रमण पर आयल छलाह। एहि फिल्म सबहक माध्यम स कईटा नव जानकारी सेहो सभागार मे बैसल लोक सब कए प्राप्त भेल। जेना जखन देश मे केवल दूटा एयरलाईन्स कंपनी होइत छल तखन दरभंगा क अपन एयरलाइन्स कंपनी छल, जेकरा लग दर्जन भरि जहाज छल। समारोह मे देखाउल गेल फिल्म सब मे विदेशी मेहमान सब लेल आयोजित खास पार्र्टी, महमान लेल विशेष अतिथिशाला यूरोपियन गेस्ट हाउस क सुंदरता, मधुबनी स्थित राजनगर किला (जे 1934 क भूकम्प मे खण्डहर भ गेल) सेहो दिखबा लेल भेटल। स्थानीय विधायक संजय सरावगी क कहब छल जे राजनगर क महल क खूबसूरती भारत क कोनो महल क खूबसूरती कए चुनौती द रहल छल। ओ महल कए देख पूरा सभागार वाह आ ओह स्वर उदघोष केलक। समारोह मे सिंहद्वार क खूबसूरती कए देख बहुत लोकक आंखि नोरा गेल। समारोह मे देखाउल गेल अन्य फिल्म मे रेलवे क स्पेशल सैलून दरभंगा क हेरायल धरोहरक टीस जगा देलक। एकटा फिल्म दरभंगाक कारोबारी चेहरा कए उजागर केलक। जाहि कालखंड मे लोक चीनी स अपरिचित छल ओहि समय मे दरभंगाक लोक लोहट मे आधुनिक मशीन युक्त चीनी मिल लगाकए नहि केवल लोक कए चीनी देलक बल्कि लोक कए रोजगार आ किसान कए नकदी फसल देलथि। 1903 मे स्थापित भारत क पहिल अत्याधुनिक चीनी मिल देखबा लेल बिहारक तत्कालीन राज्यपाल क भ्रमण देखबा लेल भेटल। लोहट पर आधारित एहि सिनेमा स दरभंगा क नेतृत्वकर्ता क दूरदर्र्शी व्यावसायिक सोच देखबा लेल भेटल। कार्यक्रम क अंतिम प्रस्तुति एकटा एहन सिनेमा छल ले दरभंगाक बदलल भूगोल कए देखा देलक। एकटा रील मे पोलो क अंतराष्ट्रीय मैच, त दोसर रील मे फुटबाल मैच। पोलो मैदान मे विदेशी खिलाडी आ भारतीय खिलाडी क बीच भ रहल मैच क दौरान दर्शक क भीड़ देख वीरान पड़ल पोलो मैदान सभागार मे खेल प्रेमी लेल उदासी क माहौल बना देलक। भारतीय फुटबाल संघ क नींव सेहो दरभंगा मे राखल गेल छल, जे एकटा फिल्म क प्रदर्शन स बुझबा लेल भेटल। आइ दरभंगा टा नहि पूरा देश इ बिसरि गेल अछि। संघ क पहिल अध्यक्ष विश्वेश्वर सिंह क नाम पर शुरू भेल कप बन्द भ गेल, जखनकि पहिल सचिव क नाम पर शुरू सन्तोष ट्रॉफी आइ तक आयोजित भ रहल अछि। समारोह मे राज परिवारक संग संग दरभंगा कए बनेबा मे जाहि परिवार सबहक योगदान रहल ओहि परिवार क वंशज सब कए विशेष रूप स आमंत्रित कैल गेल छल। मंच स कार्यक्रम क उद्घोषक आ सूत्रधार आशीष झा कहला जे एहि कार्यक्रम क उद्देश्य केवल इतिहास स साक्षात्कार नहि छल बल्कि वर्तमान कए सुंदर बनेबाक कोशिश सेहो अछि। इस अवसर नगर विधायक संजय सरावगी कहला जे अगर हम धरोहर कए निर्माण नहि क सकैत छी त कम स कम एहि धरोहर सब कए नष्ट करबाक काज सेहो नहि करि। ओ धरोहरक संग भ रहल उपेक्षा कए रेखांकित करैत एकरा शीघ्र बंद करबाक मांग केलथि। संस्कृत विश्वविद्यालय क कुलपति डॉ रामचंद्र झा कहला जे इ भूमि ज्ञान क केंद्र रहल अछि आ ओ दिन जरूर आउत जहिया इ भूमि फेर स ज्ञान क केंद्र बनत। एहि मौका पर कईटा गणमान्य लोेक उपस्थित छलथि। कार्यक्रम क आयोजक मिराज सिद्दिकी धन्यवाद ज्ञापन केलथि। दरभंगा लेल सामान्य कार्यक्रम स अलग भेल एहि कार्यक्रम कए देखि सभागार स निकलल एक एक टा दरभंगवी क चेहरा पर गौरवशाली अतीत क गर्व आ वर्तमान क पीड़ा क मिश्रण भाव साफ देखा रहल छल।
साभार : हमर अहि लेख के सम्पादित अंश ई-समाद.कॉम पर प्रकाशित अछि.
दोसर फिल्म ओहि कार्यक्रमक छल जाहि मे शामिल हेबा लेल भारत क वायसराय विटोरी दरभंगा भ्रमण पर आयल छलाह। एहि फिल्म सबहक माध्यम स कईटा नव जानकारी सेहो सभागार मे बैसल लोक सब कए प्राप्त भेल। जेना जखन देश मे केवल दूटा एयरलाईन्स कंपनी होइत छल तखन दरभंगा क अपन एयरलाइन्स कंपनी छल, जेकरा लग दर्जन भरि जहाज छल। समारोह मे देखाउल गेल फिल्म सब मे विदेशी मेहमान सब लेल आयोजित खास पार्र्टी, महमान लेल विशेष अतिथिशाला यूरोपियन गेस्ट हाउस क सुंदरता, मधुबनी स्थित राजनगर किला (जे 1934 क भूकम्प मे खण्डहर भ गेल) सेहो दिखबा लेल भेटल। स्थानीय विधायक संजय सरावगी क कहब छल जे राजनगर क महल क खूबसूरती भारत क कोनो महल क खूबसूरती कए चुनौती द रहल छल। ओ महल कए देख पूरा सभागार वाह आ ओह स्वर उदघोष केलक। समारोह मे सिंहद्वार क खूबसूरती कए देख बहुत लोकक आंखि नोरा गेल। समारोह मे देखाउल गेल अन्य फिल्म मे रेलवे क स्पेशल सैलून दरभंगा क हेरायल धरोहरक टीस जगा देलक। एकटा फिल्म दरभंगाक कारोबारी चेहरा कए उजागर केलक। जाहि कालखंड मे लोक चीनी स अपरिचित छल ओहि समय मे दरभंगाक लोक लोहट मे आधुनिक मशीन युक्त चीनी मिल लगाकए नहि केवल लोक कए चीनी देलक बल्कि लोक कए रोजगार आ किसान कए नकदी फसल देलथि। 1903 मे स्थापित भारत क पहिल अत्याधुनिक चीनी मिल देखबा लेल बिहारक तत्कालीन राज्यपाल क भ्रमण देखबा लेल भेटल। लोहट पर आधारित एहि सिनेमा स दरभंगा क नेतृत्वकर्ता क दूरदर्र्शी व्यावसायिक सोच देखबा लेल भेटल। कार्यक्रम क अंतिम प्रस्तुति एकटा एहन सिनेमा छल ले दरभंगाक बदलल भूगोल कए देखा देलक। एकटा रील मे पोलो क अंतराष्ट्रीय मैच, त दोसर रील मे फुटबाल मैच। पोलो मैदान मे विदेशी खिलाडी आ भारतीय खिलाडी क बीच भ रहल मैच क दौरान दर्शक क भीड़ देख वीरान पड़ल पोलो मैदान सभागार मे खेल प्रेमी लेल उदासी क माहौल बना देलक। भारतीय फुटबाल संघ क नींव सेहो दरभंगा मे राखल गेल छल, जे एकटा फिल्म क प्रदर्शन स बुझबा लेल भेटल। आइ दरभंगा टा नहि पूरा देश इ बिसरि गेल अछि। संघ क पहिल अध्यक्ष विश्वेश्वर सिंह क नाम पर शुरू भेल कप बन्द भ गेल, जखनकि पहिल सचिव क नाम पर शुरू सन्तोष ट्रॉफी आइ तक आयोजित भ रहल अछि। समारोह मे राज परिवारक संग संग दरभंगा कए बनेबा मे जाहि परिवार सबहक योगदान रहल ओहि परिवार क वंशज सब कए विशेष रूप स आमंत्रित कैल गेल छल। मंच स कार्यक्रम क उद्घोषक आ सूत्रधार आशीष झा कहला जे एहि कार्यक्रम क उद्देश्य केवल इतिहास स साक्षात्कार नहि छल बल्कि वर्तमान कए सुंदर बनेबाक कोशिश सेहो अछि। इस अवसर नगर विधायक संजय सरावगी कहला जे अगर हम धरोहर कए निर्माण नहि क सकैत छी त कम स कम एहि धरोहर सब कए नष्ट करबाक काज सेहो नहि करि। ओ धरोहरक संग भ रहल उपेक्षा कए रेखांकित करैत एकरा शीघ्र बंद करबाक मांग केलथि। संस्कृत विश्वविद्यालय क कुलपति डॉ रामचंद्र झा कहला जे इ भूमि ज्ञान क केंद्र रहल अछि आ ओ दिन जरूर आउत जहिया इ भूमि फेर स ज्ञान क केंद्र बनत। एहि मौका पर कईटा गणमान्य लोेक उपस्थित छलथि। कार्यक्रम क आयोजक मिराज सिद्दिकी धन्यवाद ज्ञापन केलथि। दरभंगा लेल सामान्य कार्यक्रम स अलग भेल एहि कार्यक्रम कए देखि सभागार स निकलल एक एक टा दरभंगवी क चेहरा पर गौरवशाली अतीत क गर्व आ वर्तमान क पीड़ा क मिश्रण भाव साफ देखा रहल छल।
साभार : हमर अहि लेख के सम्पादित अंश ई-समाद.कॉम पर प्रकाशित अछि.
Thursday, November 28, 2013
मूक रहितो फिल्म बाँचि रहल छल स्वर्णिम अतीत
‘वैवरेण्ट दरभंगा’ केलक अभिभूत
दरभंगा, 28 नवम्बर, फिल्ममे हवाइ जहाज उड़ि रहल छल आ लोकक मन सिहा रहल छल। तहिया आइ सन संसाधन नञि छल आ दरभंगाक हवाइ अड्डासँ एक-दू नञि कतेको जहाज उड़ि रहल छल, उतरियो रहल छल। जे असलीहत छल से आइ सपना अछि। दरभंगावासी देखि रहल छला लक्ष्मीश्वर विलास, राजनगरक ऐतिहासिक आलीशान भवन, मन्दिर, हाथी आ घोड़ा, पोलो खेलाइत महाराज आ अंग्रेज लोकनिकेँ, फुटबालक राष्ट्रिय मैच आदि। भखरल वर्त्तमान दर्शककेँ हठात् स्वर्णिम अतीतपर विश्वास नञि जमऽ दऽ रहल छल, मुदा छल सत्य। ई सत्य गौरवशाली अतीतसँ सभक आँखिमे चमक भरि रहल छल तँ धरोहरिक उपेक्षा केर वर्त्तमान सभकेँ विषादसँ सेहो भरि रहल छल। फिल्म मूक रहितो बहुत किछु बाजि रहल छल। अवसर छल बृहस्पतिकेँ पीटीसीक ऐतिहासिक विशेश्वर सिंह सभागारमे दरभंगा फिल्म क्लब आ ई समाद दिससँ आयोजित ‘वेवरेण्ट दरभंगा’ केर। आइसँ 72 बरख पूर्वक रंगीन वीडियो केर माध्यमे वैभवशाली अतीत आ एहिमे समाजक सभ वर्गक सहभागितासँ परिचित करबैत वर्त्तमानकेँ सम्हारबा लेल जागरूकताक सनेस देनिहार एहि आयोजनमे फिटिन, बग्गी, लखमाणी परिवारक सहयोगेँ चिमनीसँ बहाराइत धूआँ, लोहट चिन्नी मिलक निरीक्षण, जीबी डेनवीक आगमन, जीवेश्वर सिंहक उपनयन, दरभंगा जंक्शनपर वायसराय लार्ड लेनलीथगो केर आगमन, प्रशासकीय व्यवस्था आदिक चित्र दर्शककेँ भाव-विभोर केलक। ओतहि दरभंगामे गठित इण्डियन फुटबॉल एसोसिएशनक बेला पैलेसमे भेल पहिल मैचसँ सेहो दर्शक परिचित भेला। एहि अवसरपर तेजकर झा आ सञ्चालन करैत ई समादक आशीष झा फिल्मक प्रसंग बहुत रास जनतब देलनि। संगहिँ एहिपर दुख प्रकट केलनि जे फुटबॉल एसोसिएशनक प्रथम अध्यक्ष राजकुमार विशेश्वर सिंहक नामपर शुरू भेल विश्वेश्वर कप बन्न भऽ गेल। ओ स्थानीय लक्ष्मीश्वर सिंह पब्लिक लाइबे्ररीमे पड़ल धूरा फाँकि रहल अछि ओतहि ओही एसोसिएशनक सचिव महाराजा सन्तोष सिंहक नामपर एखनो ट्राफी चलि रहल अछि। उपेक्षाक बादो किछु दिन पूर्व संस्कृत विविक भवनकेँ एक सर्वेमे 15 महलमे 15म स्थान भेटल जँ संरक्षित रहैत तँ कोना स्थान भेटैत? एहि अवसरपर कासिंद संस्कृत विविक कुलपति डॉ. रामचन्द्र झा, नगर विधायक सञ्जय सरावगी, पूर्व मेयर ओमप्रकाश खेड़िया धरोहरिक सुरक्षा आ दरभंगाक विकास लेल समवेत प्रयासक बात कहलनि। ओतहि विजय बैरोलिया दरभंगामे पहिल बेर इजोत अनबा लेल अपन पूर्वज कृष्णा बैरोलियाक अवदानकेँ सार्वजनिक रूपसँ राखल जेबासँ अभिभूत छला। आयोजनमे मेराज सिद्दीकी, गौतम, प्रभाकर झा आदिक सक्रिय सहयोग रहल।Friday, November 15, 2013
दिल्ली में दू दिवसीय मिथिला महोत्सव काल्हिसँ
नई दिल्ली, अखिल भारतीय मिथिला संध केर तत्वाधान में आईसँ राष्ट्रिय राजधानी दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में दू दिवसीय मिथिला महोत्सव मनाओल जायत। कार्यक्रम के उद्घाटन दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित करती। विशेष अतिथि मैथिली -भोजपुरी अकादमी केर अध्यक्ष अजित दुबे आ आम्रपाली ग्रुप के एमडी अनिल शर्मा रहता। पहिल दिनक कार्यक्रम केर पहिल सत्र में स्वतंत्रताक आन्दोलन मे मिथिलाक योगदान, मिथिला मे कीर्तन परम्परा, मैथिली पारम्परिक गीत मे सीता, मिथिलाक लोक संस्कृति, ज्योतिरीश्वर एवं विद्यापति कालीन सामाजिक स्थिति सन गंभीर विषय पर चर्चा होयत । जाहि में गंगेश गुंजन, महेंद्र मलंगिया, देवशंकर नवीन, प्रदीप बिहारी आदि भाग लेतथि। साँझ चारि बजे स’ लोकनाट्य आ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजनक कायल जायत जाहि मे रंगमंच बेगुसराय केर द्वारा नाटक, जट – जटिन आ मधुबनी सँ आयल टीम केर द्वारा पमरिया नाच देखबाक सू अवसर दिल्ली वासी के भेटतन्हि। संगहि मैथिली केर प्रसिद्द गायक नंद जी, सुनील पवन, रश्मि दत्त, सियाराम झा सरस आदि केर गायन केर प्रस्तुति सेहो होयत।
अगिला दिन 17 नवम्बर क’ हिन्दी भवन मे 12 बजे दिन स’ शुरु होयत मिथिला फिल्म महोत्सव । जाहि मे लगभग दस टा मैथिली वृत्तचित्र देखाओल जायत । संग संग एहि फिल्म पर विचार विमर्श सेहो चलैत रहत ।
Wednesday, November 13, 2013
उत्तिष्ठ-उत्तिष्ठ गोविन्द देवोत्थान एकादशी आइ
कार्त्तिक मासक शुक्ल पक्षक एकादशी तिथिकेँ देवोत्थान व्रत कयल जाइत अछि। मान्यता अछि जे आषाढ़ शुक्ल एकादशीकेँ भगवान शयन करै छथि आ भाद्र शुक्ल एकादशीकेँ करोट फेरै छथि। ओतहि कार्त्तिक शुक्ल एकादशीकेँ जगै छथि। एहि तीनू एकादशीकेँ फराक-फराक नामसँ सम्बोधित कयल जाइत अछि। जहिया भगवान सुतै छथि से हरिशयन एकादशी, जहिया करोट फेरै छथि से पार्श्व परिवर्त्तिनी-कर्माधर्मा एकादशी आ जहिया जगै छथि ओ देवोत्थान एकादशीक नामसँ प्रसिद्ध अछि। एहि सभ एकादशीमे व्रत कयल जाइत अछि।
देवोत्थान एकादशीमे व्रत करबा लेल एकादशी द्वादशी युक्त ग्रहण करबाक चाही। जँ एकादशी तिथिमल रूपी हो तँ तथापि सैह ग्राह्य मानल गेल अछि। कहल गेल अछि जे तिथिक मान एक दिन 60 दण्ड हो तथा दोसर दिन उदय समयमे किछु काल हो तँ ओ तिथि मल कहल जाइत अछि जे व्रतमे त्याज्य थिक, मुदा एकादशीक तिथिमलो व्रतमे ग्राह्य थिक। हँ, दशमी विद्धा एकादशी व्रत दोषपूर्ण मानल गेल अछि। एकादशी व्रतक पूर्वक दिन अर्थात् दशमी आ परवर्ती दिवस अर्थात् द्वादशी दिन एकभुक्त करबाक विधान अछि-
दशम्यां नरशार्दूल! द्वादस्यामपि वैष्णव:।
सम्यग् व्रतफलं प्रेप्सुर्नकुर्यान्नशि भोजनम्।।
देवात्थान एकादशी दिन मिथिलामे घरे-घरे लोक भगवानक पूजा-अर्चना करै छथि। जतऽ भगवानकेँ जगायल जाइ छनि ओतहि भगवतीकेँ घर करबाक पारम्परिक विधान सेहो होइत अछि। आङनमे तुलसी चौड़ा लग पिठारसँ गृहस्थीक यावन्तो वस्तुक अड़िपन दऽ सिन्दुर लगा एक गोट अष्टदल अरिपन देल जाइत अछि। ओहि अरिपनपर एक गोट पीढ़ी राखल जाइत अछि। ओहि पीढ़ीमे सिन्दुर-पिठार लगा ओकरा चारू कात कुशियार आदिसँ मण्डप बनाओल जाइत अछि। साँझमे तुलसीचौड़ा लग पूजाक यावन्तो सामान फूल, चानन, धूप, दीप नैवेद्य तिल, तुलसीक मज्जर, फूल, माला आदि व्यवस्थित कयल जाइत अछि। नैवेद्यमे सामयिक वस्तु अल्हुआ, सुथनी, सिंहार आदि सेहो रहैत अछि। पीढ़ीक चारू कोनपर दीप देल जाइत अछि। तुलसी चौड़ा आ गोसाउनिक घरमे दीप जरायल जाइत अछि। व्रती स्नानादि कऽ आसनपर बैसि पञ्चदेवताक पञ्चोपचार पूजा करै छथि आ विष्णुपूजा कऽ भगवानकेँ उठेबाक मंत्र पढ़ि हुनका जगबै छथि। नक्त व्रत केनिहार साँझमे फलहार करै छथि आ पूर्ण व्रती राति भरि उपासमे रहि प्रात: काल ब्राह्मण भोजन करा पारण करै छथि। ओहि मण्डपमे पूजा-अर्चना कऽ भगवानकेँ मंत्रक संग उठाओल जाइ छनि।
भगवानकेँ उठेबाक मंत्र :
ऊँ ब्रह्मेन्द्र रुद्रैरभिवन्द्यमानो भवान ऋषिर्वन्दितवन्दनीय:।
प्राप्तां तवेयं किल कौमुदाख्या जागृष्व-जागृष्व च लोकनाथ।।
मेघागता निर्मल पूर्ण चन्द्र: शरद्यपुष्पाणि मानोहराणि।
अहं ददानीति च पुण्यहेतोर्जागृष्व च लोकनाथ।।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द! त्यज निद्रां जगत्पते।
त्वया चोत्थीयमानेन उत्थितं भुवनत्रयम्।।
एमहर साँझमे भगवतीकेँ घर करबाक पारम्परिक विध सेहो होइत अछि। तुलसी चौड़ा लगसँ गोसाउनक चिनुआर धरि पैरक छाप केर अरिपन देल जाइत अछि आ सिन्दुर-पिठार लागल अछिञ्जल भरल लोटासँ भगवतीकेँ घर करबाक विध पूरा कयल जाइत अछि। भगवानकेँ चढ़ाओल गेल प्रसादक वितरण अपना सर-कुटुम आ समाजक बीच कयल जाइत अछि। मिथिलामे कोनो पाबनि हो आ गीत नञि हो ई कोना भऽ सकैत अछि। बहुत ठाम भगवानक गीत-गायनक परम्परा सेहो अछि।
साभार : मिथिला आवाज़ मैथिली दैनिक समाचार में प्रकाशित
साभार : मिथिला आवाज़ मैथिली दैनिक समाचार में प्रकाशित
Monday, November 11, 2013
आउ संकल्प ली आ बचाबी बहिन सामाकेँ
जँ भ्रूण हत्या करैत रहब, गर्भेमे कन्या-भू्रणकेँ चीन्हि ओकरा नष्ट करैत रहब तखन कोना होयत सामा-चकेवाक ई पर्व? जखन कन्याकेँ उकन्नन करैत रहब तँ भ्रातृ द्वितीया, सामा-चकेवा, रक्षाबन्धन आदि सभक उठाव भऽ जायत। बेटीक अभावमे बेटा सेहो नञि होयत। हमरा लोकनि लेल बहिन कते मंगलकामना करै छथि से रातिमे कने कान पाथि सुनी आ विचार करी, की हमरा लोकनि अपना बहिनक लेल किछु नञि कऽ सकै छी? की हुनक कल्याण-कामना हमरा सभक दायित्व नञि? आउ सामा-चकेवाक एहि पुनीत पर्वपर संकल्प ली जे लिंग परीक्षण कऽ कन्या-भ्रूण हत्यामे हमरा लोकनि रञ्चो मात्र लेल सहभागी नञि होयब। आन भायकेँ सेहो एहि लेल टोकि तँ सकिते छी। जँ एको गोट सामाकेँ धरतीपर एबाक अधिकारसँ वञ्चित करबाक कुत्सित प्रयास हमरा लोकनि रोकि लै छी तँ सत्ते अपन दायित्वक निर्वाह कऽ सकब आ अपना जीवनकेँ धन्य कऽ सकब।
रातिक नीरवतामे बहिन लोकनिक समवेत स्वर पसरब शुरू भऽ गेल अछि। छठिक पारण केर रातिएसँ बहिन लोकनि एकठाम जमा भऽ सामा खेलब आरम्भ कऽ देलनि अछि। भाइ केर दीर्घ जीवन, हुनक सुयश, हुनक समग्र विकास, हुनक गुणक बखान करैत बहिन लोकनिक सामूहिक गीत-स्वर वातावरणमे मिसरी घोरि रहल अछि- ‘गाम के अधिकारी तोँहे बड़का भैया हो...।’
एकरा संगहिँ झरकाओल जा रहल अछि ‘चुगिला’ केर मुँह। बहिन लोकनि ‘साम-चक साम-चक अबिहऽ हे...’ केर संगहिँ माटिक बनाओल कुरूप चुगिला केर मुँह झौँसैत गाबि रहल छथि- ‘इण्डामे गरइ छपपट करै चुगिला केर बहुआ साँझे मरै।’
सगरो मिथिलामे सामा-चकेबा खेलबामे बहिन लोकनि जूटल छथि। से पहिल दिन अबोध बहिन सेहो सामा छूलनि तँ वयोवृद्धा बहिन सेहो। सभ अपन भाइ केर नाम लऽ हुनक कल्याण-कामनामे जुटल छथि। हालेमे जन्म लेनिहार भाइ होथि आ कि एहन वयोवृद्ध भाइ जिनका मुँहमे एगो गोट दाँत नञि बचल होनि सभक नाम गीतमे बहिन लोकनि लऽ रहल छथि।
पद्मपुराणमे वर्णित अछि कथा
ओना एकरा लोकपर्व कहि सम्बोधित कयल जाइत अछि, मुदा एकर सम्बन्ध पद्मपुरणाक कथासँ अछि। ओहिमे वर्णित अछि जे भगवान श्रीकृष्णकेँ जाम्वती नामक स्त्रीसँ एक पुत्र आ एक पुत्र छलथिन। पुत्रक नाम छलनि साम्ब आ पुत्री छलथिन सामा। सामा केर विवाह चारुवक्त्रसँ भेल छलनि जे जनकण्ठमे चकबा नामसँ विराजमान छथि। सामाकेँ वृन्दावनसँ अत्यधिक स्नेह छलनि। ओ नित्य वृन्दावन जाथि आ ओहि ठाम सप्तर्षि लोकनिक दर्शन करथि आ कथा-पुराण सुनि घुरि आबथि। एहि बातकेँ चूड़क (चुगिला) नोन-मिर्चाइ लगा श्रीकृष्णकेँ कहलथिन जे सामा चोरा-नुका कऽ वृन्दावन जाइ छथि। चूड़क तेना एहि बातकेँ रखलक जे श्रीकृष्ण क्रोधित भऽ गेला। ओ सामाकेँ श्राप दऽ देलथिन जे अहाँ चोरा-नुका कऽ वृन्दावन जाइ छी तँ पक्षी बनि जाउ आ वृन्दानवनमे वास करू। एहि शापसँ सामा पक्षी भऽ गेली। श्रीकृष्णक एहि श्रापसँ सामाक पति चारुवाक्त्र अत्यन्त दुखी भेला। ओ महादेवक तपस्या आरम्भ केलनि। महादेव प्रसन्न भऽ वरदान मङबा लेल कहलथिन तँ ओ कहलनि जे भगवान श्रीकृष्णक शापसँ हुनक प्रिया सामा पक्षी भऽ गेली अछि तेँ शिव हुनको पक्षी रूप देथि, जाहिसँ ओ वृन्दावनमे हुनका संग रहि सकथि। तखन महादेव हुनका चक्रवाक (चकवा) पक्षी बना देलथिन। ओ सामाक संग वृन्दावनमे रहऽ लगला। एमहर साम्ब ओहि समयमे बाहर छला जखन ई घटना भेल छल। घुमला तँ सभटा जतनब भेलनि जाहिसँ ओ अत्यन्त दुखी भेला। दुखी साम्ब बहिन-बहिनोइ केर उद्धार लेल श्रीकृष्णक आराधना आरम्भ केलनि। पिता श्रीकृष्ण हुनक तपश्चर्यासँ प्रसन्न भेलथिन आ वरदान मङबा लेल कहलथिन। तखन साम्ब अपन बहिन-बहिनोइ केर उद्धार लेल निवेदन केलथिन। एहिपर श्रीकृष्ण कहलथिन ‘कार्त्तिक मास हमर प्रिय अछि। तेँ कार्त्तिक मासक कृष्ण पक्षक पड़िवमे खढ़क वृन्दावन, सप्तर्षि, सामा, चकबा आ अहाँक माटिक मूर्त्ति बना नित्य पूजा करथि। गामक बाहर खेतमे ओकरा घुमावथि। माटिक चुगिला बनाबथि आ ओकर मुँह झरकाबथि। कार्त्तिक पूर्णिमाकेँ मूर्त्ति सभक विसर्जन करथि आ भायकेँ मधुर आदि भोजन कराबथि। तखन सामा शाप मुक्त हेती। ’भगवान श्रीकृष्णक निर्देशक आलोकमे साम्ब अपना देश भरिमे स्त्रीगण लोकनिसँ कार्त्तिक मासमे सामा केर पूजन करेलनि जाहिसँ सामा आ चक्रवाक शाप मुक्त भेला। सामा अपना भाइकेँ आशीर्वाद दैत कहलथिन जे कार्त्तिक मासमे जे कोनो बहिन सप्तर्षिक संग हुनक भाय साम्ब आ हुनक पूजन करती तिनका हुनके सन भाय प्राप्त हेथिन आ ओ सोहाग आ सन्तानसँ भरल-पुरल रहती। पद्मपुरणाक एही कथाक आधारपर सामा-चकेवाक खेल कार्त्तिक मासमे पूर्णिमा धरि बहिन लोकनि पूरा मनोयोगसँ करै छथि। एहि कथानकमे इहो जनश्रुति जुड़ल अछि जे चूड़क वृन्दावनमे आगि लगा सामा आ चक्रवाककेँ डाहबाक प्रयास केलक, मुदा तेहन बरखा भेल जे ओ किछु नञि बिगाड़ि सकल। भाय साम्ब आ बहिन सामाक स्नेहकेँ अपना जीवनमे साकार करबाक अभिलाषासँ बहिन लोकनि आइयो सामा-चकेवाक खेलमे जुटल छथि। बहुत रास बहिन लोकनि अपने हाथे माटिक सामा बनेलनि अछि तँ अधिकांश कुम्भकार द्वारा विभिन्न रंगसँ ढेउरल आकर्षक सामा-चकेबाक मूर्त्ति कीनि हिनक पूजनमे जुटल छथि। सामा-चकेवा संग झाँझी कूकुर, सप्तर्षि, सतभैया चिड़ै, खुरुचि भैया, बाटो बहिन आदि बनाओल गेल अछि। एकरा संगहिँ नव खढ़, सण्ठी आदिसँ वृन्दावन आ पटुआ केर दाढ़ी-मोछक संग चुगिला बनाओल गेल अछि। नित्य रातिमे भोजन-छाजनसँ निश्चिन्त भऽ बहिन लोकनि सामाक डाला माथपर लऽ गामक चौबटिया अथवा कोनो खेतमे जुटै छथि। एकठाम सभ सामा रखै छथि आ एक-दोसराक हाथमे सामा दैत ओरा फेरैत वातावरणमे गीतक मधु-स्वर घोरै छथि- ‘साम फेरलो ने जाय...।’ एहिमे गामक धी-बेटीक सहभागिता तँ अछिए, गामक पुतहु लोकनि सहो जुटल छथि। पुतहु बेसी दूर खेते-खेते नै जेती तेँ घरो लग सामा-चकेवा खेलल जा रहल अछि। एहि लेल बहिन लोकनि नैहर आयल छथि तँ गामक कतेको पुत्रवधू अपना नैहर गेल छथि।
हँसीसँ सरावोर होइत अछि राति
सामा-चकेवाक खेलक क्रममे ननदि-भाउजक परिहासपर राति सेहो मुसुकि उठैत अछि। ओतहि जखन बहिन लोकनि वृन्दावन जरा ओकरा मिझबैत गबै छथि ‘वृन्दावनमे आगि लागल क्यौ ने मिझाबय हे...’ तँ भाय-बहिनक स्नेहसँ अभिभूतो होइत अछि। बहिन लोकनि जखन चुगिलाक मुँह झरकबैत ओकर अकल्याणक कामना करै छथि ‘धान-धान-धान भैया कोठी धान, भुस्सा-भुस्सा-भुस्सा चुगिला कोठी भुस्सा’, ‘चुगिला करय चुगलपन बिलैया बाजय म्याउँ धऽ ला चुगिलाकेँ फाँसी देउँ’ तँ वातावरण बहिन लोकनिक समवेत हँसीसँ सराबोर भऽ उठैत अछि। आनन्दपूर्ण एहि प्रक्रियाक बाद सामाक डाला लऽ बहिन लोकनि घर घुरि जाइ छथि। सामाक डालाकेँ शीतेमे राखल जाइ छनि।
पूर्णिमाकेँ डोलीपर बिदा हेती सामा
सामा-चकेवाक ई खेल पूर्णिमासँ एक दिन पूर्व धरि चलत। पूर्णिमाकेँ भाइ केरा केर थम केर डोली बनेता। ओहिपर सामा राखल जेती। जेना बेटी-धी केर विदागरी होइ छनि तेना हुनक खोँइछ भरल जेतनि। चूड़ा-दहीक भोग लगतनि। भाय डोलीकेँ कान्ह लगा पोखरि किंवा कोनो धारक कात धरि पहुँचेता। ओहि ठाम मूर्त्तिक विजर्सजन होयत। कतेको ठाम मूर्त्तिकेँ भाय तोड़ै छथि आ ओकरा खेत आदिमे माटिक तर गाड़ि देल जाइत अछि। एकर बाद बहिन मुरही, बतासा, लड्डू आदिसँ अपना भाइ केर फाँड़ भरती। एकरा संगहिँ भाय-बहिनक एहि मुधर प्रेमक पर्व सामा-चकेवाक समापन होयत।
बहिन रहती तखन ने सामा
हमरा लोकनि भाय-बहिनक एहि स्नेहिल पर्वमे तँ समवेत छीहे। बहिन लोकनिक अपना गीतमे हमरा सभक नामोल्लेख करैत हमरा सभक कल्याण-कामना कैए रहल छथि। हमरा लोकनि सामाक विसर्जनमे तँ सहभागी हेबे करब, मुदा जे वर्त्तमान जा रहल अछि ताहिमे सामा-चकेवाक ई पर्व एहिना चलैत रहत? हमरा लोकनिकेँ जेना बेटी-बहिनसँ अभाँछ भेल जा रहल अछि तेनामे तँ ई पाबनिए समाप्त भऽ जायत। जी हँ, एही तरहेँ जँ भ्रूण हत्या करैत रहब, गर्भेमे कन्या-भू्रणकेँ चीन्हि ओकरा नष्ट करैत रहब तखन कोना होयत सामा-चकेवाक ई पर्व? जखन कन्याकेँ उकन्नन करैत रहब तँ भ्रातृ द्वितीया, सामा-चकेवा, रक्षाबन्धन आदि सभक उठाव भऽ जायत। बेटीक अभावमे बेटा सेहो नञि होयत। हमरा लोकनि लेल बहिन कते मंगलकामना करै छथि से रातिमे कने कान पाथि सुनी आ विचार करी, की हमरा लोकनि अपना बहिनक लेल किछु नञि कऽ सकै छी? की हुनक कल्याण-कामना हमरा सभक दायित्व नञि? आउ सामा-चकेवाक एहि पुनीत पर्वपर संकल्प ली जे लिंग परीक्षण कऽ कन्या-भ्रूण हत्यामे हमरा लोकनि रञ्चो मात्र लेल सहभागी
नञि होयब। आन भायकेँ सेहो एहि लेल टोकि तँ सकिते छी। जँ एको गोट सामाकेँ धरतीपर एबाक अधिकारसँ वञ्चित करबाक कुत्सित प्रयास हमरा लोकनि रोकि लै छी तँ सत्ते अपन दायित्वक निर्वाह कऽ सकब आ अपना जीवनकेँ धन्य कऽ सकब। एहि प्रयासेक बलपर बहिनक अशेष शुभकामनाक अधिकारी होयब। नञि तँ सामा-चकेवाक ई पावन अवसर इतिहास गाथा बनि जायत। सभ बरख बहिन लोकनि जे हमरा लोकनिक मन-प्राण अपन आशीर्वादसँ जुड़बै छथि ताहि लेल लालायित रहि जायब। आबऽ वला पीढ़ी जखन संकटापन्न होयत आ बेटीक अभावमे बेटा पायब सेहो सम्भव नञि होयत तखन भने हमरा लोकनिक भौतिक काया नञि रहत, मुदा आत्मा सीदित होइत रहत कारण ओहि परिस्थितिकेँ भोगनिहार एहि दोष लेल हमरे सभकेँ दुर्वचन कहत। आउ सामा-चकेवाक पर्वपर अपना भीतर केर पिशुन प्रवृत्ति, किंवा चुगिला सन व्याप्त अधलाह विचारकेँ समाप्त करबाक संगहिँ ली सामाकेँ बचेबाक संकल्प।
साभार : अमलेन्दु शेखर पाठक के ई लेख मिथिला आवाज़ मैथिलि दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित अछि.
साभार : अमलेन्दु शेखर पाठक के ई लेख मिथिला आवाज़ मैथिलि दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित अछि.
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