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Wednesday, August 15, 2012

उत्तर बिहार में ३८ अरब के उद्योग लागत

उत्तर बिहारक बेरोजगारक लेल नीक खबर अछि. एतय उद्योग लगावई क लेल आब दोसर राज्यक औद्योगिक घराना सेहो आबी रहल छैथ. नव उद्योग लगवाईक लेल 53 नव उद्योग के अनुमति भेटल हे, जकर अनुमानित लागत करीब 38 अरब अछि. उद्योग के प्रस्ताव के स्टेट इनवेस्टमेंट बोर्ड  पारित कय देलक.
अहि में स बहुतो क  सीएम कैबिनेट बोर्ड सेहो मंजूरी दय देलक . अहि उद्योग में सोलर पीवी पावर प्रोजेक्ट, नमकीन, बेकरी, मुर्गी दाना, आटा मिल, सिलिंडर प्लांट, बीयर आ राइस प्लांट प्रमुख अछि. एकर सूची सेहो बिहार सरकारक साइट पर जारी कय देल गेल. जहनी की पाहिले  स अनुमति प्राप्त अनेको उद्योग आब प्रोडक्शन क लेल तैयार अछि .
सबस बेसी  उद्योग वैशाली में लागत. एतय 20 उद्योग लगवई  के स्वीकृति भेटल अछि. जहनी की उत्तर बिहार में सबसे अधिक पूंजीक निवेश समस्तीपुर में कायल जायत. एतय 29 अरब क  10 उद्योग लागत. जाहिमे 2250 करोड़क फ्यूल थर्मल पावर सेहो शामिल अछि. मुजफ्फरपुर में छह उद्योग लागत, जकर लागत करीब डेढ़ अरब क होयत.
हजारों लोग के भेटत  रोजगार
अहि उद्योग सब के शुरू भेलाक बात उत्तर बिहारक करीब तीन हजार लोग के रोजगार भेटत. विभिन्न उद्यमि जे प्रस्ताव सरकार के भेजलैथ हे  ओहिमे संभावित लागत आ  विभिन्न पद पर कर्मी के संख्या सेहो दर्शायल गेल अछि . उत्तर बिहार के 53 उद्योग में करीब तीन हजार रोजगार के संभावना अछि. जाहिमे मजदूर स ल क एमबीए डिग्री धारक युवक के सेहो बहाली होयत.

Friday, June 29, 2012

बारहवी पास केलाक बाद असमंजस

बारहवी पास केलाक बाद विद्यार्थी सब के आगू के पढ़ाई लेल मन में असमंजस रहा छैन , आब आगू की करू कतय
नाम लिखाऊ कुन कोर्स करू आ कम स कम पाई में बढ़िया काज भ जाई आ अभिभावक के बेसी भार नै दैत अप्पन
पाठन में अग्रसर होई जय स स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में सहयोग भेटै एवं नीक कंपनी में नौकरी लैग जाई बस
ठाठ स ज़िंदगी मौजा ही मौजा. लेकिन एहि लेल जरुरी ऐच्छ नीक मार्गदर्शन आ नीक कोलेज में नामांकन. अहि लेल
चिंता फीकर करनाई स्वाभाविक बात ऐच्छ. एहि महत्वपूर्ण काज में मिथिलांचल के सपूत श्री विभय कुमार झा काफी
साल स लागल छैथ. विद्यार्थी के हरसंभव नीक रास्ता देखाबैत हुनक इच्छानुसार कोर्से लेल गाइड आ मार्गदर्शन में
अहम् सहयोग पिछला एक दशक स क रहल छैथ. विभय कुमार झा www.VKJha.in मिथिलांचल के प्रसिद्ध परिवार
स ताल्लुक रखैत छैथ. विभय जी Little Angel's School पटना , कोलकाता एवं केंद्रीय विद्यालय पीतमपुरा ,
नयी दिल्ली स स्कूल के शिक्षा दीक्षा लेलन्हि. दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज स स्नातक एबम गाज़ियाबाद के
प्रतिष्ठित बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज BLS Institute of Management स पोस्ट ग्रेजुएट विभय झा सन २००५ स
बिभिन्न प्रतिष्ठान में नौकरी क रहल छथीन. वर्तमान में सिंगापूर के एक बहुराष्ट्रीय प्रतिष्ठान में मानव संसाधन एबम
प्रशासन विभाग में कार्यरत छैथ. रुचि में संगीत , देश विदेश घूमनाई , शतरंज एवं बैडमिन्टन खेलनाई ,फोटोग्राफी
एवं पार्टी अटेंड करै के साथ साथ विभय जी राजनीतिक गतिविधि में सेहो रुचि रखैत छैथ. विभय जी के नेटवर्क नीक
होई के कारण बिभिन्न कॉलेज आ विश्वविद्यालय में बढ़िया सम्बन्ध बनने छैथ. ताहि हेतु नामांकन के समय में विद्यार्थी
के सहायता में काफी सक्रिय भ जाइत छैथ..अगर अहू सब असंजस में छी आ समाधान चाहैत छी त विभय जी स
सम्पर्क क सकैत छी.

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AICTE)

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· Mechanical Engineering 60 4 Years
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साभार : विभय कुमार झा
 
 

Tuesday, June 12, 2012

मैथिली जर्नल तिरहुत क विमोचन

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विवि क मैथिली विभाग में सोमदिन एक समारोह में मैथिली जर्नल ‘तिरहुत’ क विमोचन कायल गेल. विमोचन कुलपति डॉ विमल कुमार केलैनी.उक्त जर्नल में साहित्य क विभिन्न विधा पर समीक्षात्मक निबंध शामिल कायल गेल अछि .अहि जर्नल क मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी क अलावा मैसूर (बैंगलुरु) क मैथिली विशेषज्ञ सब लिखलैनी हे .
प्रमुख रचनाकार में साहित्य एकेडमी क विद्यानाथ झा, सुरेश्वर झा, मोहन भारद्वाज, रामानंद रमा, कमला चौधरी आ आइडी झा शामिल छैथ.अहि मौका पर अपन संबोधन में कुलपति डॉ विमल कुमार शोध पत्रिका क छात्र-छात्रा आ शोधार्थि क लेल काफी लाभकारी बतेलैनी. समारोह में डॉ कमला चौधरी, डॉ इंद्रनाथ झा, डॉ सदाशिव खवारे, डॉ राज कुमार झा सहित अन्य शिक्षक आओर विवि पदाधिकारी मौजूद छलैथ.

बीमारी आब 'यमराज' के जेहेन प्रतीत भ रहल अछि

बिहारक मुजफ्फरपुर जिला क औराई प्रखंडक कोरियाही गांवक चार वर्ष आरती क मौत क बाद हुनक घर में मातम पसरल छैन। हुनकर मां क आंखी स नोर रुकी नहीं रहल छैन त हुनकर पैघ भाई अपन पिता क लग ठाड़ भ इ दिलासा द रहल छथिन कि भगवान क  येह मर्जी छलैनी। ई खिस्सा जिलाक कोनो एक प्रखंड क नहीं अछि, लगभग सब प्रखंड क बस्ति में लोग क अज्ञात बीमारीक डर मन में बैसी गेल छईन। हुनका सब के ई  बीमारी आब 'यमराज' के जेहेन प्रतीत भ रहल छैनी आ मन में ई डर बैसल छईन  की कहू ई बीमारी हुनका घर में सेहो नही आवी जाई।

कोरियाहीये गांम में अहि अज्ञात बीमारी स पीड़ित छोटी कुमारी क पिता रामेश्वर कहैत छैथ कि आखिर अस्पताल में जाई स की होयत। ओतयो त बच्चा सब मरीये  रहल अछि। ओ आक्रोश में कहलैथ कि आखिर गर्मी शुरू होई क पहिले सरकार अहि रोगक इलाज किएक नहीं खोजलक  जहैनी की हर साल अहि बीमारी स  सैकड़ों गरीब बच्चा क जान जा रहल छई।

इम्हर, दू  वर्षक अन्नु क मां कहैत छईथ , "सरकार त लापरवाह अछिये संगही भगवान सेहो ई बीमारी खाली गरबे  क देत छथिन। आखिर एकर इलाज कतय होयत। सुनैत छियई कि मच्छर क काट स ई बीमारी होइत अछि त फेर दवा क छिड़काव किएक नहीं होइत अछि।"

बिहार के मुजफ्फरपुर, गया आ पटना क अस्पताल में अहि अज्ञात बीमारी स अहि साल एखन तक 100 स बेसी बच्चाक मौत भ चुकल अछि। किछ चिकित्सक अहि बीमारी क 'एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम' कही रहल छैथ जहनी की किछ चिकित्सक अहि बीमारी पर नव शोध हेवाक जरूरत बता रहल छाईथ।

राज्य क स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे कहलैथ की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी), पुणे क चिकित्सक सबक  मत अछि कि अहि बीमारीक वायरस क पहचान के लेल सीधे मस्तिष्क स ऊतक क आवश्यकता अछि। आ इ तखने सम्भव होयत जहैनी एकरा महामारी घोषित कायल जाय। ओ कहला कि अहि मामला में ओ केंद्र सरकार स बात करे वाला छाईथ । दुनु सरकार क सहमति क बाद आगाक कदम उठायल जायत। ओ इहो कहला कि अधिकांश मौत एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम बीमारी स भ रहल अछि।

चौबे कहलैथ कि इ बीमारी कोनो नव नहीं अछि। हुनक दावा अछि कि 1995 में सेहो अहि अज्ञात बीमारी स500 स बेसी बच्चाक मौत भ चुकल अछि। स्वास्थ्य विभाग के आंकडा क अनुसार 2007 स एखन  धरी अहि बीमारी स 570 बच्चाक मौत भ चुकल अछि।
 
पिछला 27 मई स एखन धरि राज्य में 100 से बेसी बच्चाक मौत भ गेला जहैनी की 97 स बेसी बच्चा  मुजफ्फरपुर, गया आर पटना क अस्पताल सब में भर्ती छैथ। सबस ज्यादा मौत मुजफ्फरपुर जिला क अस्पताल में भ रहल अछि।


इम्हर, नई दिल्ली स मुजफ्फरपुर आयल 'नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम' (एनवीबीडीसीपी) क  टीम श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में भर्ती भेल मरीजक हालचाल लेलैनी आ हुनक रिपोर्ट के अध्ययन केलैनी।

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन ज्ञानभूषण कहलैथ कि दल मरीज के ब्लड सुगर, लीवर फंक्शन, रीढ़ क पानी सहित अन्य रिपोटक जांच केलैनी। सूत्र क मुताबिक टीम अहि स्थिति के ल क सबस ज्यादा नाराज नजर आवि रहल छैथ कि आखिर समय रहैत मरीज अस्पताल किएक नहीं पहुंच पावि रहल छैथ। दल टीकाकरण कार्यक्रम के सेहो समीक्षा केलक।

Monday, June 11, 2012

कांस्य युग में सेहो छल सोशल नेटवर्किंग साइट!

वैज्ञानिक कांस्य युगीन सभ्यताक लोग द्वारा आपस में बातचीत करै क लेल उपयोग कायल जाई वाला फेसबुकक प्राग ऐतिहासिक संस्करण खोजईक दावा केलक अछि। 
रूस आओर स्वीडन में दू टा ग्रेनाइट चट्टान स्थल पर बनल तस्वीर के अध्ययन केलाक बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयक टीम दावा केलक कि ई स्थल सोशल नेटवर्किंग साइटक प्राचीन संस्करण अछि, जतय उपयोगकर्ता अपन विचार आ भावना क सांझा करैत छला आ एक दोसरक सहयोग पर स्वीकृतिक लगावैत छला। ई पूर्णतया ओहने छल, जेना आई काइल फेसबुक पर लाइक केल जैत अछि।
शोधकर्ता मार्क सापवेल एकटा बयान में कहलैथ कि अहि जगह के बारे में किछ वाकई बहुत विशेष अछि। हमरा लागैत अछि कि लोग ओतय अहिलेल गेला, कियाक हुनका बुझल छल की हुनका स पहिले ओतय किछ लोग गेल छलैथ। 

विश्वक पहिल यूनिवर्सिटी फेर स नव राह देखावक लेल तैयार

नालंदा विश्वविद्यालय (एनयू) एक बेर फेर स विश्व क राह  देखायत । ई अपन हारावल ख्याति क वापस प्राप्त करत । एकर पूरा तैयारी कायल जा रहल अछि। एतय पढ़ाओल  जाई वाला पाठ्यक्रम बेस प्रभावी होयत। पाठ्यक्रम निर्माण पर विशेष ध्यान देल गेल अछि। उक्त बात विश्वविद्यालयक  कुलपति गोपा सभरवाल कहलैनी।  ओ कहलथि  कि विश्वविद्यालय क ढांचा निर्माण में हवा क बहाव, सूर्यक रोशनी आ बहैत पानी क ख्याल राखल गेल अछि। 



विश्वविद्यालयक पहिल इवेंट



एनयू कुलपति गोपा सभरवाल कहलैनी कि 19 जुलाई क बोर्ड मीटिंग के तुरंत बाद 20 जुलाई स 22 जुलाई 2012 धरी  पटना में इंडियन काउंसिल ऑफ कल्चरल रिसर्चक संग  कांफ्रेंस ‘सिविलाइजेशन डायलॉग एंड द एशियन’ आयोजित होयत। जाहिमे 15 देशक प्रतिनिधि भाग लेता।



केन्द्र स भेट रहल अछि मदद



ओ कहलैनी कि नालंदा विश्वविद्यालयक काम क प्राथमिकता देवक लेल विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव नालंदा के पद सृजित केलैनी हे। अहि के अतिरिक्त मोंटेक सिंह अहलूवालिया क अध्यक्षता में योजना आयोगक  एक पृथक कमेटी सेहो गठित भेला। 



पृष्ठभूमि बनल ताकत



ओ कहलैनी कि नालंदा के ग्रामीण पृष्ठभूमि ओकर ताकत अछि। ग्रामीण क्षेत्र क शहरी सुविधा उपलब्ध करावई क बेहतरीन मॉडल विश्वविद्यालय पेश करत। अहिक लेल 'रूलराइजेशनक' विशेषज्ञ प्रोफेसर ते क्योंग शून काम क रहल छियाथ।



बंद नहीं भेला मदद



कुलपति गोपा सभरवाल कहलैनी  कि अंतरराष्ट्रीय मदद बंद नहीं भेला। बिना मांगने सब देश सबस पूर्ण मदद भेट रहल अछि। चीन स एक मिलियन डालर, थाईलैंड स एक लाख डालर, यूनेस्को के गुडविल एम्बेसडर मदनजीत सिंह स 1 मीलियन डालर क घोषणा कायल जा चुकल अछि। अहिक अलावा आस्ट्रेलिया आर सिंगापुर स मदद भेटै वाला अछि। ओ कहलैनी कि हमर प्राथमिकता प्रोजेक्ट क ठाड़ केनाई अछि। 



दिल्ली शिफ्ट हुअ क खबर अफवाह



ओ स्पष्ट कहलैनी कि नालंदा विश्वविद्यालयक दिल्ली स्थानांतरित हुअ  क खबर अफवाह मात्र अछि। ओ कहलैनी कि विश्वविद्यालयक मौलिकता स कोनो छेड़-छाड़ नहीं होयत। विश्वविद्यालय हर हाल में राजगीर में बनत।

Sunday, June 10, 2012

बिहार में रहस्यमय बीमारी स एखन धरि 96टा बच्चा के मौत


बिहार में लगभग दू दशक स हर साल गर्मी के मौसम में अज्ञात बीमारी स बच्चा के मौत होइत अछि आ अहि साल सेहो ई सिलसिला जारी अछि जहनी की सरकार इलाज त  दूर अहि बीमारी के पहचान करै में सेहो विफल अछि। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावा क रहल अछि  कि ओ अहि स निपटई के लेल पूरा इंतजाम केलक अछि लेकिन हकीकत ई अछि कि पिछला 15 दिन में अहि बीमारी स अखनी तक 96 बच्चा काल के गाल में समा गेला। अपुष्ट खबर के मुताबिक ई संख्या अहि स बेसी अछि।



अहि अज्ञात बीमारी स सबस बेसी प्रभावित मुजफ्फरपुर जिला अछि। आई फेर ५ और बच्चा के मौत भ गेल आ  १२ अन्य बच्चा बिभिन्न अस्पताल में भर्ती करायल गेला।  



बतादी की अहि बीमारी के जांच जारी अछि, परंतु सम्भावना व्यक्त कयल जा रहल अछि कि ई 'एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिन्ड्रोम' भ सकैत अछि।


पटना के  जानल-मानल  चिकित्सक डॉ़ निशीन्द्र गांव में इलाज मुहैया करावई के आवश्यकता पर बल देलैथ। अनेक प्रभावित गांव के दौरा केलक बाद निशीन्द्र कहला की, "45 डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चा गांव में गंदगी वाला स्थान पर बिना कपड़ा के रौद में घुमैत छैथ ।" ओ प्रश्न केला कि आई कतेक  गांव में डीडीटी के छिड़काव कायल जैत अछि? ओ कहला कि अहि बीमारी के मूल कारण मच्छर, गंदगी आ कुपोषण अछि।



सत्तारुढ़ गठबंधन के घटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार इकाई के अध्यक्ष आ प्रसिद्ध चिकित्सक सी़ पी़ ठाकुर कहला की ई बीमारी 80 के दशक स प्रत्येक वर्ष गर्मी में ग्रामीण क्षेत्र में अपन कहर बरपावैत अछि।



स्वास्थ्य विभाग के तैयारी में विफल रहै के प्रश्न पर ओ कहला कि बात सफलता आ असफलता के नहीं अछि एकरा दूर करै के लेल सबके आगा आव पड़त । अखनी तक अहि बीमारी के नाम तक नहीं पता चलल अछि हालांकि ठाकुर कहला कि देश में जांच के सुविधा उपलब्ध नहीं भेला पर नमूना के विदेश भेजल जा सकैत अछि आ  ओ  अहि  विषय में स्वास्थ्य विभाग स स्वयं बात करता।



स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमरदीप सिन्हा बतेला  कि मुजफ्फरपुर आ गया के मेडिकल कॉलेज में अहि बीमारी स निपटई  के लेल चिकित्सक, दवा आ  एम्बुलेंस तक के व्यवस्था कायल गेला। ओ कहला, "विभाग अहि रहस्यमयी बीमारी स निपटई के हरसम्भव कोशिश क रहल अछि । सरकार 11 जिला के ध्यान में राखी क व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रहल अछि।"



सिन्हा के मुताबिक केंद्र सरकार के अनुसंधान टीम पूरा वर्ष एतय रही क  अहि  बीमारी के अध्ययन करत ।



बतादी कि पिछला साल सेहो अहि बीमारी स गया आ मुजफ्फरपुर जिला में 150 स बेसी बच्चा के  मौत भेल छल जहनी की  वर्ष 2010 में 35 आ   वर्ष 2009 में 50 बच्चा के  मौत भेल छल ।