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Thursday, November 3, 2011

शिक्षक पात्रता परीक्षा के तिथि में बदलाऊ भ सकैत अछी

प्रारंभिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीइटी) के तिथि में बदलाऊ भ सकैत अछी. करीब दर्जन भर जिला स परीक्षा केंद्र के सूची अखनि धरी नहीं आयल अछी . चार नवंबर क जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीइओ) के बैठक में टीइटी आ माध्यमिक-उच्चतर माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीइटी) के तैयारि के समीक्षा होयत.

अखनि टीइटी की तिथि तीन-चार दिसंबर क निर्धारित अछी. अहि तिथि के किछ और आगा बढावल जा सकैत अछि. परीक्षा केंद्रों के सूची तैयार का सब जिला के बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के भेजबाक अछी . परीक्षा केंद्र के सूची के अंतिम रूप देलाक बाद अहि लिस्ट के राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के सौपल जायत. अहि के बाद परिषद एडमिट कार्ड तैयार करत.

तकर बाद एडमिट कार्ड के वितरण होयत. एसटीइटी के तिथि पर अखन कोनो निर्णय नहीं लेल गेल अछी. हालांकि, मानव संसाधन विकास मंत्री पीके शाही स्पष्ट कर चुकल छैथ कि एसटीइटी जनवरी, 2012 में होयत. दुनु परीक्षा में 60 फीसदी अंक लावा वाला छात्र उत्तीर्ण मानल जायत.

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, महिला व निशक्त कोटि के अभ्यर्थियों के पांच फीसदी के छुट देल जायत. दुनु परीक्षाओं के रिजल्ट प्रकाशन क बाद शिक्षक नियुक्ति के प्रक्रिया शुरू होयत. टीइटी व एसटीइटी में उत्तीर्ण व्यक्ति केवल संबंधित शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो भ सकैत अछी.

Wednesday, November 2, 2011

सामा-चकेवा आइ अपन वजूदक लेल संघर्ष कए रहल अछि


भाई-बहिन क पवित्र प्रेम क प्रतीक पर्व सामा-चकेवा आइ अपन वजूदक लेल संघर्ष कए रहल अछि। ओना मिथिलाक किछु भाग मे एखनो लोकगीत स गुंजायमान एहि पर्वक महत्व कायम अछि। छठिक राति स कार्तिक पूर्णिमा तक बहिन क कंठ स निकलैत स्वर लहरी कान मे मधु टपकाबैत अछि। राति कए बहिन सामा-चकेवा क मूर्ति क संग-संग वृंदावन, चुगला आदि स भरल डाला ले कए सामूहिक रूप स जोतल खेत, खलिहान, चौक-चौराहा पर जुटय लगैत छथि। छोट-छोट नैना क संग-संग बूढिय़ा बहिन तक एहि मे हिस्सा लैत छथि। एहि दौरान बहिन ‘गाम कए अधिकारी तोहें बड़का भैया हो, हाथ दस पोखरि खुना दिए, चंपा फुल लगा दिए हे…Ó आदि गीत क संग सामा-चकेवा क मूर्ति एक-दूसर क हाथ मे दकए पहिने अपन-अपन भाईक दीर्घ आयुक कामना करैत छथि। एहि पर्वक खास गप ई सेहो अछि जे एकर गीत मे पर्यावरण संरक्षण क संदेश सेहो देल जाइत अछि। कार्तिक पूर्णिमाक राति बहिन सामा-चकेवा क मूर्ति क संग-संग वृंदावन, चुगला आदि स भरल डाला ले कए जोतल खेत मे जमा होइत छथि। ओहि ठाम सबस पहिने शिरिक आदान-प्रदान होइत अछि। एहि प्रक्रियाक संबंध मे कहल जाइत अछि जे जतेक बहिन स शिरिक आदान-प्रदान करब भाइक बैस ओतेक बढ़त। ताहि लेल बहिन सब टोल-मोहल्लाक एकोटा मौगि स शिरिक आदन-प्रदान करब नहि बिसरैत छथि। एहि दौरान साउस-पुतहु व ननदि-भाउज एक-दोसरा स शिरिक आदान-प्रदान करैत गाउल गीत मे अपन सबटा भाईक नाम एक-एक कए लइत जाइत छथि। फेर प्रतीक रूप म वृंदावन मे आगि लगा कए ओहि मे चुगला कए जड़ा कए गबैत छथि,’वृंदावन मे आगि लागल कियो नहि मिझाबे हे, हमर बड़का-छोटका भईया मिलकए मिझाउत हे।Óबहिन चूड़कक पुतला क मुंह झुलसा कए खराब चरित्र क प्रति विरोध दर्ज कैत ओकरा लेल अपशकुन क कामना करैत छथि। फेर पिछला 15 दिन मे बनाउल एक-एक टा सामा-चकेवा क मूर्ति कए लग कए घर दिस विदा भ जाइत छथि। मुदा भाग्य चक्र स बिमुख दू टा मैना, जेकरा बाटो-बहिन कहल जाइत अछि, तेकरा बाट पर छोडि़ दैत छथि। घर पहुंचला पर भाई स सामा-चकेवा क सबटा मूर्ति तुड़वा लैत छथि। एना खत्म होइत अछि सामा-चकेबाक शापित काल।
के छलीह सामा
ई लोकपर्व पद्म पुराण मे वर्णित भगवान श्रीकृष्ण क पुत्री साम्बवती व पुत्र साम्ब क पवित्र प्रेम पर आधारित अछि। चुड़क नामक एकटा चुगला श्रीकृष्ण लग चुगलि करैत अछि जे हुनक पुत्री साम्बवती वृंदावन जाइत काल ऋ षि क संग रमण मे लागल छथि। चूड़कक मुख सई सुन क्रोधित भ श्रीकृष्ण पुत्री आ ऋषि दूनू के मैना बनि जेबाक शाप द देलथि। साम्बवती क वियोग मे ओकर वर चक्रवाक (चकेबा)सेहो मैनाक रूप धारण करि लैत अछि। साम्बवतीक भाई साम्ब जखन इ सुनलक त तपस्या करि पिता श्रीकृष्ण कए प्रसन्न करैत अछि आ बहिन-बहनोई कए शाप स मुक्त करैत अछि। ओहि दिन स मिथिला मे सामा-चकेवा पर्व छठिक पारण क राति स कार्तिक पूर्णिमा तक मनाउल जाइत अछि।
साभार:- झा विपिन

डिग्री पार्ट टू के परीक्षाफल नहीं प्रकाशित कायल गेला

परीक्षा के चार महिना बीत गेला क बाबजूद अखनी धरी डिग्री पार्ट टू के परीक्षाफल मिथिला विश्वविद्यालय के द्वारा नहीं प्रकाशित कायल गेला जाही कारण परीक्षार्थि सब के परेशानी बढ़ी गेला । एहेन बहुत छात्र छैथ जे डिग्री पार्ट थ्री के परीक्षा में त उत्तीर्ण छैथ लेकिन डिग्री पार्ट टू के परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशित नै भेलाक कारण हुनकर परीक्षाफल लंबित छैन। लंबित परीक्षाफल वाला क्षेत्र के संख्या सैकड़ों में छैन। मिथिला विश्वविद्यालय कतेको छात्र के डिग्री पार्ट वन की परीक्षा के मा‌र्क्स नहीं रहलाक कारण डिग्री पार्ट थ्री के परीक्षाफल लंबित छैन। मिथिला विश्वविद्यालय के लेल इ कोनो नव गप्प नहीं अछी ३ साल के डिग्री ५ साल में इ विश्वविद्यालय देत अछीमिथिला विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुधारक लेल कतेको प्रयास कायल गेला मुदा अखनी धरी कोनो ठोस परिणाम नहीं निकलल अछी। जाही कारण अहि विश्वविद्यालय के छात्र सब के कतेको परेशानी के सामना करा परैत छैन

'भारत में अछि दुनिया के सबस बेसी ग़रीब'

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी केल गेल मानव विकास रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया के सबस पैघ लोकतंत्र, भारत में, दुनिया के सबस ज़्यादा बहुआयामी ग़रीब रहित अछी.

भारत में 61 करोड़ लोग ग़रीब अछी, जे कि देश की आधी आबादी स बेसी अछी .

रिपोर्ट में गरीब के मूल्यांकनक लेल आय के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा जीवन स्तर के तरजीह देल गेल.

रिपोर्ट के मुताबिक बहुआयामी ग़रीबों की संख्या निकालने वाला इ सूचकांक एक समुचित-सटीक तस्वीर पेश करैत अछी जे कि खली आय के मानक मानी का संभव नहीं अछी .

अहि सूचकांक के मुताबिक़ दुनिया के दस सबस ग़रीब देश त सहारा अफ़्रीका में अछी , लेकिन अगर कोनो एक देश के कुल संख्या के बात कायल जाए त दुनिया क सबस ज़्यादा ग़रीब दक्षिण एशियाई देश (भारत, पाकिस्तान आ बांग्लादेश) में रहैत अछी .

सरकार देश में ग़रीबक संख्या आँके के लेल कतेक तरीका अपनेलग आ सरकार मानैत अछी कि देश में सिर्फ एक-तिहाई जनता ग़रीबी रेखा के निचा रहैत अछी .

वर्ष 2011 में अखन तक के सबसे ज़्यादा 187 देश के श्रेणीबद्ध कल गेल जाही में भारत 134वें पायदान पर अछी.

चीन, 101वें पायदान पर आ पाकिस्तान 145वें पायदान पर अछी.

नार्वे, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड सूची में सबस ऊपर , अमरीका चौथे जापान 12वें नंबर पर अछि.

1980 स 2011 के समयावधि में दक्षिण एशिया के कतेक देश के तरह भारत के मानव विकास के सेहो बदहाल अछी .

यूएनडीपी में भारत की निदेशक केटलिन वीसेन के मुताबिक, “हमरा भारत में औद्योगिक विकास के कार्यक्रमों पर व्यापक अध्ययन क इ सुनिश्चित कर परत कि अहि के सतत विकास होयत रहे आ वो विकास ग़रीब लोगों के लेल सेहो हुआ.”

Sabhar: BBC Hindi

अखन तक प्रदर्शित मैथिली फिल्म

मैथिली फिल्म के इतिहाश में बरका पर्दा पर अखन तक प्रदर्शित फिल्म
वर्ष १९९९ के अंत मैथिली फिल्म के स्वर्णिम काल
मैथिली फिल्म के आधुनिक स्वरूप मुखिया जी प्रदर्शन के करिव
कन्यादान .......................................१९७१
जय बाबा बैधनाथ .............................१९७३
ममता गाबे गीत ..............................१९८२
सस्ता जिन्दगी महंग सेनुर ................१९९९
आऊ पिया हमर नगरी .......................२०००
सेनुरक लाज ....................................२००४
कखन हरब दुःख मोर ........................२००५
दुलरवा बाबु .....................................२००६
सेंदुरदान..........................................२००८
सेनुरया{साउथ के मथिली में रूपांतरण} ..२०१०
अपन गाम अपन लोग [अ प्रदर्शित}.........२०१०
पिया संग प्रीत करब कोना ...................२०१०
सजना के अंगना में सोलह सिगार .........२०११
मुखिया जी {कमिग सुन}......................२०११

साभार:-शशि मोहन दरभंगा

Tuesday, November 1, 2011

कोसी में विलुप्त भ रहल अछी दुर्लभ जीव व वनस्पति

निकटवर्ती देश नेपाल स निकलक सहरसा, सुपौल आ मधेपुरा जिला में तबाही मचाव वाली कोसी नदी के बाढ़ नहीं सिर्फ अहि इलाके के आर्थिक धरोहर व सामाजिक संरचना के बिगाड़ का अछि बल्कि आब अहि क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन को बनावे वाला जीव व वनस्पति सेहो विलुप्त भ रहल अछी हैं। कोसी नदी के अनवरत धारा बदले, मिट्टी के कटाव आ हर साल बालू की मात्रा बढई स प्राकृतिक इकोसिस्टम नष्ट भ रहल अछि अहि कारण पहिलहे कतेक जीव-जंतु आ मछलियां भ गेल अछी।

वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक डा. अंजनी सिन्हा कहैत छैथ की अहि इलाका में औषधीय महत्व के सैकड़ों वनस्पति पायल जीत चल । शक्तिव‌र्द्धक महत्व वाला अश्वगंधा, ब्रेन टानिक के रूप में इस्तेमाल होवा वाला ब्रम्ही, उच्च रक्त चाप कम करे वाला सर्पगंधा, प्रसूति टानिक सतावर, काली खांसी आ श्वास रोग के इलाज में उपयोग होवा वाला गिलोय, रक्त व‌र्द्धक पुनर्नवा, कैंसर रोधी सदाबहार, गठियारोधी सुरंजन, गर्भ निरोधक कपास, आँख के पुतली प्रसारक बैलाडोना आ चर्मरोग के इलाज में प्रयुक्त होवा वाला घी कंवार जेहेन वनस्पित जे इंसानों क जीवनक आधार होइत छल,अहि ठाम खूब भेटैत छल। अहि क लेल दूर दूर स लोक सब अहि ठाम आबैत छलैथ, परंतु आब इ जड़ी- बूटियां खोजलो स नै भेटैत अछी । वनस्पति आ जीव विज्ञान के जानकार के मानव छैन कि अहि वनस्पतियों के कम भेला स अहिपर आश्रित जीव प्रजातियों के संख्या सेहो घटल अछी। बर्बाद भेल वनस्पितयों के कारण ओही पर आश्रित जंगली सुअर, नीलगाय, खिखिर, नकार, शाही आ खरगोश लुप्तप्राय भ चुकल अछी।

अहि क्षेत्र में 122 किस्म के मछलि पायल जाय छल । परंतु हर वर्ष आवे वाला बाढ़ कंडवाल, फोकचा, राजवाम, सुसुक कंचल, लाल कतरा, सुही चंदा, केसिरा चंदा, सावन खड़िका, ठुनका, पतासी, गुथल नगरा, कोसवती, अन्नाई सन मछलि के सेहो अपना संग वाहा का ला गेल। इ सब नाम मात्र एक टा खिस्सा बनी का रही गेल अछी। अगर एतय बचल जीव और वनस्पतियों के संरक्षण प्रदान नहीं कल गेल त आबे बाला समय में इ मात्र इतिहास के एक टा वास्तु रही जायत।

KBC-5 में एक और बिहारी करोड़पति


देश के सबस पैघ रियलिटी शो कौन बनेगा करोरपति में बिहारी टेलेंट अपन पूरा टेलेंट देखा रहल अछी! कौन बनेगा करोरपति सीजन ५ के हॉट सीट पर अमिताभ बच्चन के संग कियक टा बिहारी अहि बेर अपन टेलेंट के परचम लहरेला हां! KBC सीजन ५ में पेशा स शिक्षक मोतिहारी के सुनील कुमार ५ करोड़ जीत क नहीं खली एक टा इतिहास रचला बल्कि एहो साबित क देला जे टेलेंट के जतय गप्प हेतई ओत बिहारी सबस आगा रहत! बिहारक टेलेंट बिहार के गाँव में बासित छाई आ अहि के पूर्ण रूप स साबित काया देला यूनियन बैंक आफ इंडिया में कार्यरत पटना के अनिल कुमार सिन्हा! अनिल कुमार सिन्हा KBC में अपन पूरा टेलेंट के देखबैत १ करोड़ रूपया जीतला! अहि स पहिले KBC-5 में मधुबनी के सरोज देवी आ शेष नाथ झा सेहो अहि प्रोग्राम में अपन उपस्थिति दर्ज करेने छैथ!