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Sunday, October 23, 2011

प्राथमिक शिक्षा के स्थिती पहिले स बेसी ख़राब

नितीश कुमार के शाशन काल में बिहार सब क्षेत्र में बहुत नीक विकास केलक अछी अहि में कोनो शक नै! लेकिन गप्प अगर बिहार प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र के काल जाय त स्थिती पहिले स बेसी अखन ख़राब अछी! जहनि की शिक्षा के क्षेत्र में पहिले के अपेक्षा बहुत बेसी पैसा व्यय भ रहल अछी ! लालू यादव के समय बिहार के स्कूल सब शिक्षक के कमी स जूझी रहल छल! मुदा ताहि के वाबजूद स्कूल सब में पूर्ण रूपें शिक्षा के माहोल छल! पहिले जे स्कूल में शिक्षक होइत छाला ओ अपन कर्त्तव्य के निर्वाह बहुत ईमानदारी स करैत छाला! तकर परिणाम इ होइत छल जे सुबह १० बजे स सांझ के ४ बजे तक बच्चा स्कूल में देखाइत छल आ हर दिन स्कूल स किछ सीख अबैत छल!

मुदा वर्तमान परित्रिस्य एकदम उल्टा अछी स्कूल में शिक्षक के कमी के दूर करैक लेल पहिले शिक्षा मित्र फेर B.Ed आ फेर मैरिट लिस्ट के आधार आ फेर एक बेर तैयारी भ रहल अछी पात्रता परीक्षा के आधार पर मुदा एते प्रयास के बाबजूद बिहार में प्राथमिक शिक्षा के स्तर में बहुत गिरावट भेला! आखिर अहि गिरावट के पीछा किएक टा कारण अछी! १. शिक्षा मित्र के तहत जे शिक्षक के बहाली भेल ओही में अधिकतर ओहेन लोग के बहाली भेल जे कोनो दृष्टिकोण एकटा नीक शिक्षक के लेल यौग्य नै छिया! २. मिड मिल जे केंद्र सरकार के एकटा योजना अछी ओकर असर सेहो कतौ ने कतौ स्कूल में गलत माहोल बनेलक भले अहि में सरकार के इ दृष्टिकोण होई जे कम स कम खाना के लोभे त बच्चा स्कूल आयत मुदा एकर असर स्कूल में कतेक ख़राब अछी इ जखन आहा बिहार के कोनो स्कूल में जायब तखने स्पष्ट होयत इ हम अहि ठाम शब्द स नहीं कही सकैत छि! ३. पहिले स्कूल सब स्वतन्त्र होइत छल ओकरा ग्रामीण राजनीती स कोनो टा मतलब नै होइत छल मुदा जहिया स स्कूल में ग्रामीण राजनीती के पैठ बढ़ल ला स्कूल सचिव मुखिया आदि त एकर परिणाम सेहो नीक नहीं रहल अछी इ सब स्कूल के नीक सञ्चालन स बेसी रूचि स्कूल के मिड मिल आ अन्य कोनो स्कूल विकास के लेल जे फंड आबैत अछी ताहि पर राखैत छैथ! जकर परिणाम इ होइत अछी जे हमेशा स्कूल के शिक्षक स ल क सब अहि में उलझल रहित छैथ विद्यार्थी पढ़े वा नै ताहि दिस बेसी रूचि नै रहैत छैन!

४. शिक्षा के स्तर में कमी के एकटा और बहुत पैघ फेक्टर अछी जे अहि में कोनो सक नै जे स्कूल में विद्यार्थी के संख्या बढलाया भले ओ नामे ला स्कूल अबैत हैत स्कूल के संख्या में कोनो इजाफा नै भेला यहाँ तक की जे स्कूल पहिले प्राइमरी चल ओ आब मिडिल भगेला त स्कूल के जे छमता छै ओही स बेसी विद्यार्थी भ गनै सेहो एकटा कारण बनैत अछि!
अगर प्राथमिक शिक्षा में कमी होयत ता इ बच्चा सब के भविष्य के लेल कतेक पैघ खेलवार होयत! की खाली आकरा टा में देखबे लेल बच्चा स्कूल आबे! आ जतेक फंड आबे ओ खाली आपसी बट्बारा लेल होई!

Monday, October 10, 2011

मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह नवंबर में

मिथिलांचल सर्वागीण विकास संस्थान बेनीपंट्टी के द्वारा लीलाधर उच्च विद्यालय के मैदान में आगामी 6, 7 व 8 नवंबर क आयोजित होई वाला तीन दिवसीय 20वां मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह सह मैथिल महासम्मेलन के तैयारी जोरों पर चली रहल अछि । मिसविस के अध्यक्ष अमरनाथ झा भोलन, सचिव विनोद यादव, कोषाध्यक्ष भगवान कुमार झा कहलैन्न की 20वां मिथिला विभूति समारोह की तैयारी जोरों पर चल रहल अछि । 6 नवंबर को उद्घाटन, मंगलाचरण, स्मारिका विमोचन, कविगोषठी, विद्यापति गीत, मैथिली नाटक होयत । 7 को विद्यापति, सलहेश, लोड़िक, दीनाभद्री, दुलरादयाल, कारिख महराज शीत बसंत व मिथिला विभूति लोक गाथा एवं कार्यकर्ता सम्मेलन तथा 8 नवंबर को उद्घाटन, सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम होयत । समारोह को यादगार बनाबाई के लेल तैयारी जोरों पर चल रहल अछि ।

Sunday, September 25, 2011

तेलंगाना जेना आन्दोलन के जरुरत मिथिला के

मिथिला राज्य के मांग पिछला ६० साल स चली रहल अछी! भारत में भाषा के आधार पर कियक टा राज्य के गठन भ चुकल अछी! यदि भाषा के आधार पर पंजाब बनी सकैत अछी कर्नाटका के राज्य के दर्जा भेट सकैत अछी त मिथिला के कियाक नहीं! मैथिलि कोनो भाषा स बेसी समृद्ध अछी ! सांस्कृतिक दृष्टी स सेहो अपना आप में पूर्ण अछी! मिथिला राज्यक मांग कोनो नव नहीं अछी मिथिला राज्य के मांग के गप्प भारत के आजादी के संगे उठल मुदा ओही समय निक नेत्रत्व के आभाव में मिथिला राज्य क गप्प त दूर मैथिलि सन समृद्ध भाषा क सेहो भारतीय संबिधान में कोनो जगह नहीं देल गेल! मैथिल सबहक संग इ एकटा बाद पैघ छल केल गेल! मुदा भले बहुत देरी लागल मुदा २००३ में अटल बिहारी जी क सरकारक समय मैथिलि भाषा क संबिधान में जगह भेटल!
मिथिला राज्य क मांग क कहियो मात्र अहि आधार पर ठुकरा देल गेल रहा जे भाषा क आधार पर मिथिला राज्य क मांग कियाक भ रहल अछी जखन क मैथिलि भाषा क संबैधानिक भाषा क दर्जा अछिए नहीं! जखन आब हमार भाषा क संबैधानिक भाषा क मान्यता भेट गेल अछी त हमरा आब मिथिला राज्य सेहो भेटबाक चाही!
कारण जाबित धरी हमरा राज्य क दर्जा नहीं भेटत टा धरी हमरा सबके बिहार पर निर्भर रहा परत आ बिहार क सब्त विकास गंगा क ओही कात होयत जे भ रहल अछी! आ केंद्र सेहो मिथिला क नाम पर चुप रहत! आ अपन सबहक नेता सब क गप्पे जुनी करू। मैथिलि स कम बजाई जे बाला भाषा सब क कियाक त टीवी चेंनेल छाई रेडियो स्टेशन छाई मुदा मैथिलि में एको टा नै। मिथिला में नै एकोटा निक स्कूल नै कॉलेज। बाढ़ी आ दहार के आलावा हमरा सब कीच नहीं देखलियाई! आखिर कतेक दिन तक हम मैथिल मिथिला राज्य क मांग पर एकजुट नै होयब?? इ एकटा सवाल अछी मिथिला राज्य टा क नै हमर अहाक भाषा आ संस्कृति क सेहो???????

Sunday, May 22, 2011

जीत के जस्न बदली गेल गम में



जीत के जस्न बदली गेल गम में किछ एहने घटना आई मधुबनी के भरिय बिसनपुर के गुमटी नो १६ पर एकता बुलेरो के टटकर गरीबरथ ट्रेन सा भा गेल! मुखिया चुनाव के स्थानीय प्रत्यासी के जीत के खबरी सुनी के जस्न मानबाई के लेल हुनका परिबार लोक गणना स्थान पर जा रहल छाला तखानी ट्रेन मधुबनी सा जयनगर जा रहल चल उक्त गुमटी पर फाटक नहीं होबाक कारन ट्रेन बुलेरो सा टकरा गेल जाहि बैसल १७ यात्री में सा १२ के घटना स्थल पर मृत्यु भ गेल !

Friday, March 11, 2011

मैथिली एकटा सम्रद्ध भाषा अछि

बिहार विधान परिषद मॆ मैथली भाषा कॊ मान्यता दॆवाक प्रस्ताव वर्ष 1939 मॆ अनल गॆल छल! 6 अक्टुबर 1939 क ग‍ंगा नंद सिंह ई प्रस्ताव अननॆ रहाईथ जॆ बिहार संस्क्रत एशॊसिएशन संस्क्रत भाषा परीक्षा मैथली मॆ लॆल जाय! हुनक तर्क छल कि वर्ष 1934 मॆ संस्क्रत सम्मॆलन मॆ हरिशचंन्द्र झा कॆ प्रस्ताव पर एकटा समिति गठित भॆल छल इ समिति मैथली भाषा कॆ मैथली भाषा कॆ मान्यता दॆवाक विचार पर निर्णाय कॆनॆ छल! 1937 तक अहि संबंध मॆ कॊनॊ निर्णय नहि भॆल आ समिति कॆ कार्यकाल सॆहॊ समाप्त भ गॆल! पुन: 1937 मॆ दॊसर समिति बनल ! समिति 20 जनवरि 1938 क अपन प्रस्ताव दॆलक! गंगानंद सिंह अहि समिति कॆ रिपॊर्ट प्रस्ताव कॆ रुप मॆ रखला आऒर कहलेन राज्य मॆ मैथली कॆ वॆह स्थिति हॆवाक चाहि जॆ बंगला आ हिंदी कॆ छै! हुनक तर्क छलैन जॆ वर्ष 1938 मॆ संस्क्रत पढै वला कुल छात्र 2900 मैथिल भाषी छलैथ आऒर 4715 नन मैथिल! 1935 मॆ मैथिल छात्र कॆ संख्या 3090 आऒर 4832 नन मैथिल, 1936 मॆ 3115 मैथिल आ गैर मैथिल कॆ संख्या 4380, 1937 मॆ 4500 मैथिल व 6104 नन मैथिल, 1938 मॆ 5300 मैथिल व 7363 गैर मैथिल छात्र छल! ऒ कहलैथ मैथिल छात्र हिंदी ही नही संस्क्रत भी पढतॆ है! इसिलिए उन्हॆ मैथिली भाषा मॆ अपनी परीक्षा दॆनी चाहिए! ऒ कहलखिन जॆ सरकार कॆ अधिकारि कॆ नजर मॆ मैथली एकटा बॊली मात्र अछि जहैन कि हुनका अहि भाषा कॆ विषय मॆ बहुत अल्प जानकारि छैन! ऒ कहलैथ जॆ मैथली भाषा गुजराति, बंगाली आ असमी कॆ तरह एकटा पुर्ण भाषा अछि! एकर अपन एकटा स्वतंत्र संस्क्रति आ परंपरा अछि! वैदिक भाषा मॆ मैथिली कॆ उद्दगम दक्षिणायत स अछि जहैन कि हिंदि कॆ मध्य स ! ऒ कहलाईथ जॆ मिथिला राज्य कई सदियॊ सॆ एक स्वतंत्र प्रांत कॆ रुप मॆ रहा है जिसकी काम काज मैथिली आ संस्क्रत भाषा मॆ हॊती थी! मैथिली का अपना एक अलग लिपि भी है! ई एकटा सम्रद्ध भाषा अछि जकरा एकर अधिकार स वंचित नहि राखि सकैत छि!

साभार प्रभात खबर‌

Thursday, March 3, 2011

280 लाख करोड़ का सवाल


280 लाख करोड़ का सवाल
है ...भारतीय गरीब है लेकिन भारत
देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये
कहना है स्विस बैंक केडाइरेक्टर
का . स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने
यह भी कहा है कि भारत का लगभग
280 लाख करोड़ रुपये
(280 ,00 ,000 ,000 ,000)
उनके स्विस बैंक में जमा है . ये
रकमइतनी है कि भारत का आने वाले
30 सालों का बजट बिना टैक्स के
बनाया जा सकता है.या यूँ कहें
कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए
जा सकते है. या यूँ भी कह सकते
हैकि भारत के किसी भी गाँव से
दिल्ली तक 4 लेन रोड
बनाया जा सकता है. ऐसा भी कहसकते
है कि 500 से ज्यादा सामाजिक
प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते
है . ये रकमइतनी ज्यादा है कि अगर
हर भारतीय को 2000 रुपये हर
महीने भी दिए जाये तो 60साल तक
ख़त्म ना हो. यानी भारत
को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने
कि कोई जरुरतनहीं है .
जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट
राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे
देश कोलूटा है और ये लूट
का सिलसिला अभी तक 2011 तक
जारी है. इस सिलसिले को अब
रोकनाबहुत
ज्यादा जरूरी हो गया है.
अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब
200 सालो तक राजकरके करीब 1
लाखकरोड़ रुपये लूटा. मगर
आजादी के केवल 64 सालों में
हमारे भ्रस्टाचार ने 280लाख
करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल
में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ
केवल 64सालों में 280 लाख
करोड़ है. यानि हर साल लगभग
4.37 लाख करोड़, या हर
महीनेकरीब 36 हजार करोड़
भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में
इन भ्रष्ट
लोगों द्वारा जमाकरवाई गई है .
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन
की कोई दरकार नहीं है .
सोचो कीकितना पैसा हमारे भ्रष्ट
राजनेताओं और उच्च
अधिकारीयों ने ब्लाक करके
रखा हुआहै . हमे भ्रस्ट
राजनेताओं और भ्रष्ट
अधिकारीयों के खिलाफ जाने
का पूर्ण अधिकारहै .हाल ही में
हुवे घोटालों का आप
सभी को पता ही है - CWG घोटाला,
२ जीस्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श
होउसिंग घोटाला ... और ना जाने
कौन कौन से घोटालेअभी उजागर
होने वाले है
एक आन्दोलन बन जाये भ्रष्टाचार
पर एन विट्ठल , किरण बेदी, एपीजे
अब्दुल कलाम की रायएनविट्ठल
( पूर्व केंद्रीय
सतर्कता आयुक्त) : भ्रष्टाचार
समाज में कैंसर कीतरह है और इससे
देश को व्यापक नुकसान हो रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ
आमनागरिकों में रोष भी है।
सभी इसके बारे में चर्चा करते
हैं , लेकिन कोई कुछकरने
की स्थिति में नहीं है।किरण
बेदी (पूर्व आईपीएस अधिकारी):
भारतमें सफेदपोश
अपराधी ही भ्रष्टाचार में लिप्त
हैं। जितना बड़ा अपराध
औरअपराधी होता है उसके बचने
की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होती है।
एपीजेअब्दुल कलाम (पूर्व
राष्ट्रपति): भ्रष्टाचार कैंसर
की तरह देश को निगल रहाहै और अब
इसकी तत्काल कीमोथेरेपी किए
जाने की आवश्यकता है।
भ्रष्टाचारमुक्त भारत बनाना आज
सबसे बड़ी चुनौती है और इसके लिए
युवाओं को आगे आनाहोगा।

Monday, January 3, 2011


नव वर्षक हार्दिक शुभकामना